उज्जैन (डॉ हीना तिवारी): विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवनवरात्रि महोत्सव की शुरुआत आज शुक्रवार सुबह से हो गई।
शिवनवरात्री महापर्व का शुभारंभ कोटेश्वर महादेव के पूजन-अर्चन से किया गया। गर्भगृह में पुजारी घनश्याम शर्मा के मार्गदर्शन में 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक एवं एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक संपन्न कराया जा रहा है।
महाकाल मंदिर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला यह विशेष शिवनवरात्रि उत्सव देश में अद्वितीय माना जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार शक्ति स्वरूपा माता की आराधना हेतु नौ दिनों तक नवरात्रि मनाई जाती है, उसी परंपरा के अनुरूप उज्जैन में भगवान शिव की आराधना के लिए शिवनवरात्रि पर्व मनाया जाता है।
प्रातःकाल कोटेश्वर भगवान का विधिवत पूजन हुआ। सायंकाल भगवान महाकाल को चंदन का उबटन लगाकर पवित्र स्नान कराया गया तथा जलाधारी पर हल्दी अर्पित की गई। दोपहर एक बजे भोग आरती के पश्चात अपराह्न तीन बजे पंचामृत पूजन संपन्न होगा। इसके बाद भगवान महाकाल का भांग से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। श्रृंगार के दौरान भगवान को लाल, गुलाबी एवं पीले रंग के नवीन वस्त्र पहनाए जाएंगे। मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंडमाला एवं छत्र से अलंकृत कर दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में यह शिवनवरात्रि महोत्सव आज 6 फरवरी से 15 फरवरी तक मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में प्रतिदिन भगवान महाकाल का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया जाएगा। जिनमें चंदन-भांग, शेषनाग, घटाटोप, छबीना, होलकर, मनमहेश, उमा-महेश और शिव तांडव श्रृंगार शामिल हैं। 15 फरवरी को सप्तधान का मुखौटा धारण कराया जाएगा।
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। इन दस दिवसीय शिवनवरात्री पर्व पर मंदिर परिसर में भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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