इंदौर: फिल्म एडिटर, निर्देशक एवं लेखक सुनील सालगिया स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के रूबरू कार्यक्रम में शामिल हुए और मीडियाकर्मियों से बातचीत की। कार्यक्रम के प्रारंभ में सालगिया का स्वागत स्टेट प्रेस क्लब मप्र अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, राजेश शिवणेकर, राकेश साहू, अजय भट्ट, कृष्णकांत रोकड़े एवं दीपक माहेश्वरी ने किया।
उन्होंने चर्चा करते हुए कहा कि कंप्यूटर के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस सदी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। एआई पर दुनिया भर की जानकारी मौजूद है लेकिन इसका उपयोग किस तरह किया जाना है यह अब महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में एआई कई मामलों में मददगार साबित हो रहा है। एआई के माध्यम से विजुअल, वीडियो, ऑडियो के बेहतर ऑप्शन मिल रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि एआई के माध्यम से वाईस रिकार्डिंग आसान हो गई है। आर्टिस्ट के व्यस्त होने पर उसके वाईस सैंपल से हूबहू रिकार्डिंग हो जाया करेगी।
सालगिया ने कहा कि नई-नई तकनीक के सहारे आज-कल झूठ भी परोसा जा रहा है। लोगों के पास सच पता करने का वक़्त नहीं है। सभी के जीवन में 30 सेकण्ड की रील अब महत्वपूर्ण हो गई है। हर वर्ग के लिए एआई की शिक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।
सालगिया ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उन्होंने लेखन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘वन अपऑन अ टाइम इनप बॉलीवुड’ नावेल लिखा। इस नावेल में उनके थिएटर, फिल्म डायरेक्शन एवं एडिटिंग से जुड़े तमाम अनुभव शामिल हैं। अभी वे दो नावेल पर काम कर रहे हैं।
सालगिया ने बताया कि फिल्म फोर्मेट पर बनी साढ़े तीन घंटे की ऐतिहासिक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म मुग़ल-ए-आज़म को कलर फिल्म में तब्दील करना उनके जीवन का अविस्मरणीय कार्य रहा। प्रसिद्ध निर्देशक के. आसिफ ने कई उतार-चढ़ाव के बाद चौदह वर्षों में यह फिल्म बनाई थी। उन्होंने एडिटर के रूप में दो वर्षों की अथक मेहनत के बाद इस फिल्म को डिजिटल कलराइजेशन के माध्यम से 2004 में रिलीज किया गया। रंगों को यथासंभव प्रमाणिक बनाने के लिए मुग़ल काल के चित्रों, कपड़ों और अन्य ऐतिहासिक सन्दर्भों का अध्यन किया गया। कलर के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया जिसमे प्रत्येक फ्रेम को अलग-अलग रंगों से पेंट किया गया। दर्शकों ने इस प्रयास को बहुत सराहा।
उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफोर्म, यूट्यूब, रेडियो एफएम आदि माध्यमों के प्रचलन की वजह से सभी के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अस्सी के दशक की तुलना से आज बीस गुना काम बढ़ गया है। इन माध्यमों से कई प्रतिभाओं को अवसर और सम्मान दोनों मिल रहे हैं। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सुरीले गीत-संगीत की उम्मीद करना बेमानी है। आज-कल गीतों में हुकलाइन का ट्रेंड चल गया है जिसमे सिर्फ एक या दो वाक्य पर गीत हिट हो जाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों के साथ ही गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सत्यजीत शिवणेकर ने किया।

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