घरेलू बाजारों में त्योहारी सीजन के चलते अमूमन सोने और चांदी की भारी मांग रहती है, जिससे इनकी चमक बढ़ जाती है। लेकिन इस बार बाजार का ट्रेंड बिल्कुल उलटा नजर आ रहा है, क्योंकि सोने और चांदी की कीमतें अपने ऊपरी स्तरों से काफी नीचे गिर चुकी हैं। चालू हफ्ते में सोने का भाव 3.5 फीसदी से अधिक टूट चुका है।
इंटरनेशनल मार्केट में वीकली गिरावट के लिहाज से जून के बाद से यह सबसे बुरा हफ्ता रहा है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के समय की तुलना में सोने की कीमत अब करीब 20 फीसदी नीचे आ चुकी है।
🪙 घरेलू वायदा बाजार और ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी के ताजा दाम
घरेलू वायदा बाजारों पर नजर डालें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर वायदा सोना गिरकर 1,42,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा भी 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।
- ग्लोबल बाजार (Comex): कॉमैक्स पर सोने का भाव गिरकर 4,040 डॉलर प्रति औंस के पास आ गया है, जबकि चांदी भी 54 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है।
- विशेषज्ञ की राय: एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज) सैश सावंत ने बताया कि सोना पिछले 4 महीनों की सबसे बड़ी वीकली गिरावट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट के कारण निवेशकों ने मार्जिन कॉल पूरा करने के लिए सोने जैसी आसानी से नकदी में बदली जाने वाली संपत्तियों को बेचा है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
📈 साल की शुरुआत में बने थे रिकॉर्ड हाई, अब तक कितनी आई गिरावट?
इस साल की शुरुआत यानी जनवरी में घरेलू बाजारों से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक सोने और चांदी की कीमतों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए थे:
- एमसीएक्स रिकॉर्ड: एमसीएक्स पर सोने ने 1,80,799 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 4.20 लाख रुपये का ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड छुआ था। फिलहाल दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से क्रमशः 21% और 56% नीचे ट्रेड कर रही हैं।
- कॉमैक्स रिकॉर्ड: ग्लोबल मार्केट में कॉमैक्स पर सोने ने 5,597.91 डॉलर प्रति औंस और चांदी ने 121.64 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जो फिलहाल 28% और 54% नीचे हैं।
- केडिया एडवाइजरी के फाउंडर अजय केडिया के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले विकल्पों के पारंपरिक व्यवहार को बदल दिया है। ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई का जोखिम बढ़ा है, जिसका सीधा दबाव कीमती धातुओं पर पड़ा है।
🛢️ कच्चे तेल में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी निवेशकों की नजर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है। महीनेभर में क्रूड करीब 13 फीसदी महंगा हुआ है, जबकि सालभर में भाव में लगभग 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
- महंगाई और बॉन्ड यील्ड का दबाव: सऊदी अरब में हूती हमलों के दोबारा शुरू होने से ब्रेंट क्रूड 5 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है।
- फेडरल रिजर्व की चाल: बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की करीब 80 फीसदी संभावना जताई जा रही है। ब्याज दरें बढ़ने से उन संपत्तियों की लागत बढ़ जाती है जिनसे नियमित आय नहीं मिलती।
- धनतेरस की उम्मीद: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी नहीं आती, तब तक सोने को लेकर रुख कमजोर रह सकता है, हालांकि धनतेरस की त्योहारी मांग कीमतों में आई इस अस्थायी गिरावट को कुछ हद तक थामने में मदद कर सकती है।

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