October 30, 2026

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Chhindwara Agriculture News Arnab Cyclone: पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, पलेवा की कमी हुई पूरी

छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में चक्रवात ‘अर्णब’ के प्रभाव से हुई बारिश किसानों के चेहरों पर मुस्कान ले आई है। इस सीजन में पानी की कमी और कम बारिश की मार झेल रहे किसानों के लिए यह मौसमी बरसात किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। इस बारिश के होने से खेतों में पलेवा (Pre-sowing irrigation) की कमी पूरी हो गई है, जिससे रबी की बुवाई करने वाले अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिली है।

💧 खेतों में पलेवा का काम करेगी यह बारिश; एक सिंचाई के बराबर मिलेगा फायदा

आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र छिंदवाड़ा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. गौरव महाजन ने जानकारी देते हुए बताया कि छिंदवाड़ा जिले में इस बार औसत से कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसके चलते रबी सीजन की फसलों में सिंचाई के लिए पानी का संकट पैदा हो सकता था।

  • फायदा: यह अचानक हुई बारिश खेतों के लिए प्राकृतिक पलेवा का काम कर रही है, जिससे किसानों को जुवाई और बुवाई से पहले एक सिंचाई के बराबर सीधा आर्थिक व शारीरिक फायदा मिल रहा है।
  • जुताई का सही मौका: जिन किसानों के खेतों से मक्का या अन्य खरीफ फसलें कट चुकी हैं (Harvesting complete), उनके लिए खेत तैयार करने और मिट्टी पलटने की गहरी जुताई करने का यह सबसे बेहतरीन समय है।
🌾 कम पानी वाले क्षेत्रों में सरसों और अलसी लगाने की सलाह

कृषि वैज्ञानिक डॉ. गौरव महाजन ने किसानों को सलाह दी है कि जिन इलाकों में सिंचाई के पर्याप्त साधन या पानी की उपलब्धता कम है, वे किसान भाई अपनी भूमि में सरसों या अलसी की फसल की बुवाई करें।

  • नमी युक्त मिट्टी में इन बीजों का अंकुरण (Germination) बहुत तेजी और आसानी से होता है, जो आगे चलकर किसानों को शानदार पैदावार और मुनाफा दे सकता है।
👨‍🌾 किसान बोले—”हमारे खेतों के लिए किसी अमृत वर्षा से कम नहीं है यह पानी”

अजनिया गांव के प्रगतिशील किसान संदीप सिंह चौधरी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छिंदवाड़ा का किसान इस बार पहले ही कम बारिश के कारण चिंतित था और रबी की फसल की बुवाई को लेकर परेशान था।

  • उन्होंने कहा कि यह बारिश किसानों के लिए अमृत वर्षा जैसी है। जिन किसानों ने अपने खेतों में सरसों की बुवाई की थी, उनके लिए यह पानी बहुत ही लाभदायक साबित होगा। इसके साथ ही इस बारिश के बाद अब खेतों में चना और मसूर की बुवाई भी सुगमता से की जा सकेगी।
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