रतलाम। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल किसानों की उम्मीदों पर खरी उतरी है। इस सीजन सोयाबीन के बाजार भाव में लगातार शानदार तेजी देखने को मिल रही है, जिसके चलते अच्छी गुणवत्ता वाला सोयाबीन ₹7,000 प्रति क्विंटल तक के उच्च स्तर पर बिक रहा है। यह दाम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी अधिक है। अच्छे बाजार भाव मिलने के कारण अब किसानों को राज्य सरकार की भावांतर भुगतान योजना की आवश्यकता ही महसूस नहीं हो रही है।
🌾 भावांतर योजना से किसानों ने बनाई दूरी: डेढ़ लाख किसानों में से सिर्फ 192 ने कराया पंजीयन
खुले बाजार में सोयाबीन के ऊंचे दाम मिलने का सीधा असर भावांतर भुगतान योजना के पंजीयन पर साफ दिखाई दे रहा है। जिले के डेढ़ लाख से अधिक पंजीकृत किसानों में से महज 192 किसानों ने ही इस योजना के लिए पंजीयन कराया है। कृषि अधिकारी हीरालाल बरफा ने बताया कि जिले में बनाए गए 64 पंजीयन केंद्रों में से मात्र 29 केंद्रों पर ही इक्का-दुक्का किसानों ने रुचि दिखाई है, क्योंकि मंडियों में किसानों को एमएसपी से काफी बेहतर भाव मिल रहे हैं।
🏛️ सरकार को भी हुई करोड़ों की भारी बचत: पिछले साल चुकाने पड़े थे 1300 करोड़ रुपये
सोयाबीन के दाम समर्थन मूल्य से ऊपर रहने का एक बड़ा फायदा मध्य प्रदेश सरकार को भी मिला है। पिछले वर्ष सरकार को भावांतर योजना के तहत राज्य के 6 लाख 25 हजार किसानों के खातों में लगभग 1,300 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा था। इस बार कीमतें एमएसपी से ऊपर होने के कारण सरकार को यह बड़ी राशि नहीं चुकानी पड़ेगी, जिससे सरकारी खजाने की भी भारी बचत हुई है। किसान अब बिना किसी कागजी झंझट के सीधे खुले बाजार में अपनी उपज बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

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