राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के बजट सत्र में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से जनजातीय कार्य मंत्री से जनजातीय समुदाय पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए उठाए जा रहे सुधारात्मक कदम के सम्बंध में सवाल किया।
सांसद डॉ. सुमेर सिंह के उक्त सवाल का लिखित जवाब देते हुए जनजातीय कार्य राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने बताया कि अनुसूचित जाति (अजा) और अनुसूचित जनजाति( अजजा) के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार को रोकने (निवारण) के लिए संसद का एक अधिनियम अर्थात अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 अधिनियमित किया गया था तथा इसे और प्रभावी बनाने के लिए 2015 में संशोधित किया गया था।
संशोधित अधिनियम में नए अपराध अनुमानों (प्रकल्पनाओ) का विस्तारित दायरा संस्थागत सुदृढ़ीकरण शामिल है, जिसमे अन्य बातों के साथ-साथ अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना और विशेष रूप से मामलों के त्वरित निपटान को सक्षम बनाने के लिए अत्याचार निवारण (पीओए) अधिनियम के तहत अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए अनन्य विशेष लोक अभियोजकों अपराधों का प्रत्यक्ष संज्ञान लेने के लिए विशेष न्यायालयों और अनन्य विशेष न्यायालयों की शक्तियां और जहां तक संभव हो आरोप पत्र दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरा करने पीड़ितो और गवाहों के अधिकार स्थापित करने और निवारक उपायों को मजबूत करने के वीनिर्देश शामिल है। यह अधिनियम पीड़ितों को राहत/मुआवजा भी प्रदान करता है और देश मे आईपीसी के साथ संयोजन में कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा की जाने वाली कारवाई को भी निर्धारित करता है।
पुलिस और लोक व्यवस्था भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य का विषय है। राज्य सरकारें/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन मुख्य रूप से अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों(एसटी) के सदस्यों के खिलाफ अपराधों सहित अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर अपराधों की रोकथाम पता लगाने पंजीकरण जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार है, साथ ही नागरिक अधिकार संरक्षण (पीसीआर) अधिनियम 1955 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) पीओए अधिनियम 1989 के कार्यान्वन्यन के लिए भी जिम्मेदार है। अत्याचारों के त्वरित पंजीकरण अपराधों की त्वरित जांच और न्यायालयों द्वारा मामलों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सरकार राज्य सरकार की कानून कार्यान्वन्यन एजेंसियों के साथ समीक्षा कर रही है।
इसके अलावा भारत सरकार ने पीओए अधिनियम और नियमो को अक्षरशः प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समय-समय पर राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों को परामर्शीया जारी की है।

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