राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के बजट सत्र में जनजातीय कार्य मंत्रालय से देश मे जनजातीय विकास की योजनाओं एवं प्रधानमंत्री वन बन्धु कल्याण योजना के सम्बंध में सवाल करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री वन बन्धु कल्याण योजना के अंतर्गत जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिए इस योजना का और विस्तार करने का विचार, अब तक मध्यप्रदेश में इस योजना से लाभान्वित होने वाले लोगो की संख्या कितनी है साथ देश मे जनजातीय विकास के लिए शुरू की गई योजनाओं का ब्यौरा क्या है?
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के सवाल का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने बताया कि प्रधानमंत्री वनबंधु कल्याण योजना जिसमे जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए कई योजनाएं शामिल है, को 26135.46 करोड़ रुपये की कुल लागत के साथ 2021-22 से 2025-26 के दौरान कार्यान्वन्यन के लिए अनुमोदित किया गया है।
पीएमविकेवाई का उद्देश्य देशभर में जनजातीय समुदायों और जनजातीय क्षेत्रो का समग्र विकास करना है,जो राज्य और केंद्रीय टीएसपी निधि के साथ अभिसरण में शिक्षा और जीविकोपार्जन में पहलों/उपायों के माध्यम से गांवों के एकीकृत विकास और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
पीएममविकेवाई के तहत कवर किये गए योजना घटक इस प्रकार है:-
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (पीएमएएजीवाई) विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीजीटी) का विकास
जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता
मेट्रिक-पूर्व छात्रवृति
मेट्रिकोत्तर छात्रवृति योजना
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना:- जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय उप-योजना (टीएसपी को एससीए) के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की योजना 1977-78 से क्रियान्वित की जा रही थी। योजना और गैर योजना के समामेलन के बाद उस योजना को 2017 से जनजातीय उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के रूप में जाना जाता था। टीएसपी को एससीए के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास, रोजगार-सह-आय सृजन आदि जैसे क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए राज्य सरकारों को निधियां उपलब्ध करायी जाती थी। महत्वपूर्ण जनजातीय आबादी वाले गांवों में बुनियादी सेवाओ और सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए गांवों के परिणाम उन्मुख और समयबद्ध तरीके से एकीकृत विकास के लिए वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान टीएसएस को एससीए को नवरूपित करके प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना करने का निर्णय लिया गया है।
योजना के तहत अधिसूचित एसटी वाले राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में कम से कम 50% जनजातीय आबादी और अनुसूचित जनजाति के 500 लोगो वाले 36,428 गांवों को सड़क सम्पर्क दूरसंचार सम्पर्क स्कूल, आंगनवाड़ी, केंद्र, स्वास्थ्य उप केंद्र, पेयजल सुविधा, जल बिक़सी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विकास के प्रमुख क्षेत्रो में अभिसरण द्रष्टिकोण के माध्यम से प्रमुख अंतरों को पाटने के लिए विकास कार्यक्रमो/गतिविधियों के लिए चिन्हित किया गया है। 2021-22 और 2022-23 के दौरान कुल लगभग 16554 गांवों को लिया गया है। योजना के तहत अबतक राज्यों को 2133.39 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है।
विशेष रूप से कमजोर जनजातियों का विकास (पीवीटीजी):- पीवीटीजी के विकास की योजना का उद्देश्य आवासीय स्तर के विकासात्मक द्रष्टिकोण को अपनाते हुए समुदायों की संस्कृति और विरासत को बनाये रखते हुए उनके व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना तैयार करना है। इस योजना के तहत शिक्षा, आवास, भूमि वितरण, भूमि विकास, कृषि विकास, पशुपालन, सम्पर्क सड़को का निर्माण, प्रकाश के उद्देश्य से ऊर्जा के गेर-पारंपरिक स्त्रोतों की स्थापना सामाजिक सुरक्षा या पीवीजीटी के व्यापक सामाजिक आर्थिक विकास के लिए और विकास में महत्वपूर्ण अंतर पाटने के लिए कोई अन्य नवीन गतिविधि जैसे विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जनजातीय लोगो के विकास के लिए उनके प्रस्तावों के आधार पर राज्य/संघ राज्यक्षेत्र की सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पीवीजीटी के विकास की योजनाओं के तहत राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों को उनके प्रस्ताव के आधार पर विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों को करने के लिए निधियां उपलब्ध कराई जाती है।
2023-24 के बजट में सरकार ने प्रधानमंत्री पीवीजीटी विकास मिशन की घोषणा की है। मिशन का उद्देश्य पीवीजीटी परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वछता, शिक्षा बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण करके विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक स्थितियों में सुधार करना है।
जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) को सहायता:- योजनाओं के तहत टीआरआई को सहायता राज्य सरकारों-संघ राज्य क्षेत्रों को उनके प्रस्ताव के आधार पर अनुसंधान प्रलेखन आदि के लिए निधियां प्रदान की जाती है।
मैट्रिक-पूर्व छात्रवृति:- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे सम्बंधित राज्य/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। यह एक अनावरत योजना है जिसमे 9वीं और 10वीं में पढ़ने वाले अनुसूचित जनजाति के वे सभी छात्र शामिल है,जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये तक है। भारत सरकार का अंशदान 75% है और राज्य का अंशदान 25% है। उत्तर पूर्व राज्यों और पहाड़ी राज्यों के सम्बंध में भारत सरकार का योगदान 90% है और स्वयं के अनुदान के मामले में भारत सरकार का अंशदान 100%है।
मेट्रिकोत्तर छात्रवृति:- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे सम्बन्धित राज्य/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। यह एक अनावरत योजना है। जिसमे 11वी कक्षा और उससे ऊपर के अनुसूचित जनजाति के वे सभी छात्र शामिल है, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये तक है। भारत सरकार का अंशदान 75% है और राज्य का अंशदान 25% है। उत्तर पूर्व राज्यों और पहाड़ी राज्यों के सम्बंध में,भारत सरकार का योगदान 90% है और राज्य का अंशदान 10% है। बिना विधान सभा वाले अंडमान और निकोबार जैसे संघ राज्यक्षेत्रों के और स्वयं के अनुदान के मामले में भारत सरकार का अंशदान 100% है।
पीएमएएजीवाई के तहत मध्यप्रदेश राज्य में विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अंतरों को पाटने के लिए परियोजनाओं को लागू करने के लिए 78,41,428 अनुसूचित जनजाति(एसटी) के लोगो की जनजातीय आबादी वाले कुल 7307 गांवों को चिन्हित किया गया है। उनमें से 1195 गांवों के सम्बंध में ग्राम विकास योजना स्वीकृत की गई है और राज्य सरकार को 27694.54 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। छात्रवृति योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2021-22 के दौरान मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लाभांवित विद्यार्थियों को संख्या का जिलेवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

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