High Court : हाईकोर्ट ने तेल कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय (Petrolium Ministry) को नोटिस जारी (Notice) कर पूछा है कि एथेनॉल मिले डीजल-पेट्रोल (Petrol) पर टैक्स लेने का क्या प्रावधान है। क्या एथेनॉल मिले डीजल-पेट्रोल पर 5 प्रतिशत से अधिक टैक्स नहीं लिया जा सकता। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डबल बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त नोटिस जारी किया है।
दरअसल डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एक जनहित याचिका के माध्यम से नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच जबलपुर के संयोजक मनीष शर्मा ने पक्ष रखा है कि इथेनॉल मिश्रित डीजल-पेट्रोल पर सरकार ने 5 प्रतिशत ही टैक्स लेने का नियम बनाया था। पर इस पर 51 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है। इसी मामले में आज चीफ जस्टिस व विजय कुमार शुक्ला की डबल बेंच में सुनवाई हुई।
याचिककर्ता ने बताया एक हजार मिलीलीटर पेट्रोल में वर्तमान में 7 से 10 फीसदी यानी लगभग 70 से 100 मिलीलीटर तक एथेनॉल मिलाया जा रहा है। बावजूद सरकार पूरे एक हजार मिलीलीटर पर टैक्स लगा रही है जबकि 51 प्रतिशत टैक्स केवल पेट्रोल की मात्रा पर यानी 900 मिलीलीटर पर वसूलना चाहिए। शेष एथेनॉल की 70 से 100 मिलीलीटर मात्रा पर 5 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स नहीं लेना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होने से लोगों को महंगा पेट्रोल मिल रहा है। आने वाले समय में एथेनॉल की मात्रा बढ़कर 300 मिलीलीटर तक पहुंच जाएगी। पेट्रोल कंपनियों एथेनॉल की मात्रा बढ़ाती जा रही हैं लेकिन इसे दर्शाया नहीं जाता।

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