कैंची धाम वाले नीम करौली बाबा को उनके भक्त हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं. उनके आश्रमों और भक्तों के बीच हनुमान भक्ति से जुड़ी कई बातें आज भी प्रचलित हैं, लेकिन बाबा केवल हनुमान जी की उपासना तक सीमित रहने की बात नहीं करते थे. वे भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण करने पर भी विशेष जोर देते थे. बाबा के संदेशों में राम नाम को बहुत खास स्थान मिलता है. इसी वजह से वे अपने भक्तों को नियमित रूप से राम नाम का जाप और अन्य देवी-देवताओं के नाम सुमिरन की सलाह भी देते थे.
सीता-राम और कृष्ण नाम का स्मरण
नीम करौली बाबा भगवान श्रीराम और माता सीता की भक्ति को भी महत्वपूर्ण मानते थे. वे सीता-राम नाम के स्मरण को ईश्वर से जुड़ने का सरल रास्ता बताते थे. उनके लिए भक्ति का मतलब केवल किसी एक रूप या एक नाम तक सीमित होना नहीं था, बल्कि पूरे मन से भगवान को याद करना था. बाबा भगवान कृष्ण के नाम के स्मरण की बात भी करते थे. वे भक्तों को अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का नाम लेने और सच्चे मन से उनका स्मरण करने की प्रेरणा देते थे.
हनुमान भक्ति और श्रीराम का संबंध
नीम करौली बाबा की हनुमान भक्ति को समझने के लिए भगवान श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति को समझना जरूरी है. हनुमान जी को भगवान श्रीराम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है. ऐसे में बाबा के लिए हनुमान जी का स्मरण अपने आप में राम भक्ति से जुड़ा हुआ था. यही वजह है कि बाबा हनुमान चालीसा के पाठ और राम नाम के जाप को महत्व देते थे.
मां दुर्गा और दूसरे देवी-देवताओं को भी माना ईश्वर का रूप
इसके अलावा नीम करौली बाबा मां दुर्गा और दूसरे देवी-देवताओं के स्मरण को भी ईश्वर की उपासना का ही एक रूप मानते थे. इसलिए बाबा के लिए राम नाम, कृष्ण नाम, हनुमान भक्ति या देवी की उपासना, सभी का अंतिम उद्देश्य मन को ईश्वर से जोड़ना था. इसलिए नीम करौली बाबा भगवान के किसी भी रूप का नाम जपने की सलाह देते थे.

More Stories
Swasti Vachan Mantra Meaning and Benefits: वेदों में क्या है स्वस्ति वाचन का महत्व, किन देवताओं का होता है आह्वान?
Ganesh Chaturthi 2026: कब से शुरू है गणेशोत्सव? जानिए गणपति स्थापना की सही दिशा, मूर्ति के नियम और वास्तु टिप्स
Hartalika Teej 2026 Significance: कब है हरतालिका तीज? जानिए व्रत की सही तिथि और मायके के रिश्तों से जुड़ी खास परंपरा