September 14, 2026

News Prawah

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MP Umaria Health System: एंबुलेंस के इंतजार में कराहती रही प्रसूता, मजबूरी में पिकअप वाहन से पहुंचाया जिला अस्पताल

उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सुविधाएं किस कदर बदहाल हैं, इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण फिर सामने आया है।

आपातकालीन स्थिति में बार-बार कॉल करने के बावजूद 108 एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके चलते गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के परिजनों को अपनी व्यवस्था से कभी ऑटो तो कभी ट्रैक्टर-पिकअप का सहारा लेना पड़ रहा है। उमरिया के बरतराई गांव से सामने आए इस मामले में प्रसूता दर्द से कराहती रही और एंबुलेंस न आने पर परिजनों को मजबूरी में उसे पिकअप वाहन से जिला अस्पताल लाना पड़ा।

⏳ 1 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे परिजन: 15 किमी दूर पिकअप वाहन में कराई जोखिम भरी यात्रा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरतराई गांव की निवासी प्रसूता को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया और करीब 1 घंटे तक उसका इंतजार करते रहे।

जब एंबुलेंस नहीं आई और प्रसूता की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी, तो परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। बरतराई गांव से जिला अस्पताल की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। प्रसूता की जान जोखिम में न पड़े, इसके लिए परिजनों ने तुरंत एक पिकअप वाहन की व्यवस्था की और किसी तरह महिला को उमरिया जिला अस्पताल पहुंचाया।

📢 ‘स्वास्थ्य सुविधाएं एहसान नहीं, नागरिकों का अधिकार हैं’: कांग्रेस नेत्री रोशनी सिंह ने खड़े किए गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस नेत्री एवं जनपद सदस्य रोशनी सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है।

रोशनी सिंह ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि “जब किसी गर्भवती महिला को समय पर बुनियादी एंबुलेंस सेवा तक न मिल सके और परिजनों को सुबह से दोपहर तक इंतजार के बाद पिकअप वाहन में अस्पताल आना पड़े, तो यह हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह तस्वीर को बयां करता है। यदि रास्ते में कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? स्वास्थ्य सेवाएं कोई एहसान नहीं, बल्कि आम जनता का संवैधानिक अधिकार हैं।”

🩺 प्रसूता और नवजात दोनों सुरक्षित: सिविल सर्जन ने कर्मचारियों को नोटिस देकर दिए जांच के आदेश

मामला तूल पकड़ने के बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. के. सोनी ने आधिकारिक सफाई पेश की है।

डॉ. सोनी ने बताया कि “वर्तमान में गंभीर मरीजों के रेफरल केस अधिक होने के कारण एंबुलेंस प्रबंधन में थोड़ी असुविधा सामने आई है। राहत की बात यह है कि प्रसूता और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल के मुख्य गेट पर समय पर कर्मचारी उपलब्ध न रहने के विषय में संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।”

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