मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर की वरिष्ठ जियोटेक्निकल इंजीनियर एवं वैज्ञानिक प्रोफेसर नीलिमा सत्यम को भूस्खलन जोखिम आकलन, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, भूकंपीय माइक्रोजोनेशन और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) के प्रतिष्ठित ‘देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल’ के लिए नामांकित किया गया है। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर की रहने वाली प्रोफेसर नीलिमा की इस बड़ी उपलब्धि से पूरे प्रदेश और शैक्षणिक जगत में गर्व का माहौल है, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
🌍 पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध के लिए दिया जाता है यह प्रतिष्ठित मेडल
अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह प्रतिष्ठित ‘देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल’ प्रत्येक वर्ष पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य करने वाले शुरुआती या मध्य-कैरियर के चुनिंदा वैज्ञानिकों को ही प्रदान किया जाता है। इस मेडल का नाम प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर देवेंद्र लाल के नाम पर रखा गया है, जिनके अग्रणी शोध कार्यों ने पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में कॉस्मोजेनिक आइसोटोप को एक प्रभावी ट्रेसर के रूप में उपयोग करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला योगदान दिया था।
📊 भूस्खलन निगरानी और एआई आधारित पूर्वानुमान प्रणाली पर केंद्रित है प्रो. नीलिमा का शोध कार्य
प्रोफेसर नीलिमा सत्यम का शोध कार्य जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, रिमोट सेंसिंग, रियल-टाइम सेंसिंग, जियोस्पेशियल एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का एक अनूठा समन्वय है। उनके इन शोधों का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय व संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को बेहतर ढंग से समझना तथा उनकी निगरानी और पूर्व-पूर्वानुमान की क्षमता को अत्यधिक मजबूत करना है। उनके प्रोजेक्ट्स में भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण, वर्षा-सीमा (रेनफॉल थ्रेशोल्ड) का विश्लेषण, मलबा प्रवाह (डेब्रिस फ्लो) की मॉडलिंग और सेंसर आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां (Early Warning Systems) शामिल हैं।
🏗️ भूकंप जोखिम आकलन और वैज्ञानिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग में भी रहा है अहम योगदान
अपने शोध के दायरे को विस्तार देते हुए प्रो. नीलिमा ने भूकंपीय माइक्रोजोनेशन और भूकंप जोखिम आकलन के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य किए हैं। इसमें उच्च-रिजॉल्यूशन शीयर-वेव वेग प्रोफाइलिंग और साइट-रिस्पॉन्स विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर ढांचागत विकास को वैज्ञानिक आधार दिया गया है। उनके वैज्ञानिक शोधों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इंजीनियरिंग के व्यावहारिक उपयोग में ढालना उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, टनल निर्माण, भू-सुधार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन मानकों को नई दिशा मिली है।

More Stories
Madhya Pradesh Municipal News: बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए नए नियम लागू, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
Gold and Silver Price Fall: रतलाम में गिरे कीमती धातुओं के दाम, व्यापारी कीर्ति बड़जात्या और क्षितिज सोनी ने बताई वजह
Madhya Pradesh Accident News: निशांत, केशव और सूरज की सड़क हादसे में गई जान, पुलिस कर रही है जांच