October 2, 2026

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Madhya Pradesh Municipal News: बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए नए नियम लागू, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

केंद्र सरकार के नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (Solid Waste Management Rules 2026) के प्रभावी होने के बाद बड़े संस्थानों और व्यावसायिक इकाइयों के लिए कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। नए नियमों के अनुसार, 20 हजार वर्गमीटर या उससे ज्यादा फ्लोर एरिया वाले भवन, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत करने वाली इकाइयां या रोजाना 100 किलो से ज्यादा ठोस कचरा पैदा करने वाली संस्थाएं ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में आएंगी। जबलपुर नगर निगम द्वारा इस व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है और महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के मुताबिक शहर में ऐसी 250 से अधिक इकाइयों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है।

🔍 वार्ड स्तर पर गठित की गईं कमेटियां: गीले और हॉर्टिकल्चर वेस्ट के लिए करनी होगी वैज्ञानिक कंपोस्टिंग की व्यवस्था

नियमों के तहत बल्क वेस्ट जनरेटरों को अपने यहां निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। गीले कचरे और हॉर्टिकल्चर वेस्ट के लिए विकेंद्रीकृत स्तर पर कंपोस्टिंग, बायोमेथेनेशन या अन्य स्वीकृत तकनीकों से प्रोसेसिंग करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा सूखा, सैनिटरी और अन्य प्रकार के कचरे के लिए अलग से प्रबंधन व्यवस्था तय करनी होगी। महापौर ने स्पष्ट किया है कि व्यवस्था की निगरानी के लिए वार्ड स्तर पर विशेष कमेटियों का गठन किया गया है, जो संस्थानों की रिपोर्ट तैयार करेंगी ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

⚡ कचरे से बिजली और बायोगैस उत्पादन में आगे बढ़ा जबलपुर: कटौंदा प्लांट से ग्रिड को भेजी गई 30 हजार MWh से अधिक बिजली

जबलपुर पहले से ही कचरे से ऊर्जा बनाने वाले ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्लांट के जरिए बड़ी उपलब्धि हासिल कर रहा है। कटौंदा स्थित इस प्लांट को आधुनिक ओवरहॉल के बाद जनवरी 2026 में दोबारा शुरू किया गया था, जिसने जनवरी से जून 2026 के बीच 30,759.50 MWh बिजली सीधे ग्रिड को भेजी है। इसके साथ ही अब नगर निगम शहर के गीले और जैविक कचरे से ‘कंप्रेस्ड बायोगैस’ (CBG) बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि उत्पादित गैस का उपयोग नगर निगम के कचरा वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा सके।

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