October 2, 2026

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Ajay Kumar Jain Guna News: बजरंगगढ़ शासनकाल के दुर्लभ सिक्कों समेत हजारों प्राचीन मोहरें मौजूद, इतिहास प्रेमियों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं यह कलेक्शन

मध्य प्रदेश के गुना शहर में एक ऐसा शख्स निवास करता है, जिसके पास लगभग दो हजार साल पुराने एक हजार से अधिक प्राचीन सिक्कों का एक ऐसा दुर्लभ और अनोखा कलेक्शन है, जिसे देखकर कोई भी दंग रह जाएगा। इन तमाम सिक्कों के साथ एक समृद्ध इतिहास जुड़ा हुआ है। राजा-महाराजाओं और मौर्य काल की मोहरों को देखकर उस प्राचीन शासनकाल की जीवंत यादें ताजा हो जाती हैं। इन सिक्कों की अद्भुत बनावट, उन पर उकेरे गए शासनकाल के प्रतीक चिन्ह और उनकी शैली हर किसी को इतिहास के पन्नों को पलटने और उसके बारे में जानने के लिए प्रेरित करती है।

👑 राहुल स्पोर्ट्स के संचालक अजय कुमार जैन के पास कुषाण वंश से लेकर भारतीय रजवाड़ों तक के सिक्के मौजूद

हैरान कर देने वाले इस प्राचीन संग्रह के मालिक ‘राहुल स्पोर्ट्स’ के संचालक अजय कुमार जैन हैं, जिन्होंने बरसों की मेहनत से विभिन्न सल्तनतों और राजवंशों के सिक्ਕें सहेज कर रखे हैं। उनके इस विशाल संग्रह में कुषाण वंश, मौर्य काल, दिल्ली सल्तनत, समकालीन मुगल काल और विभिन्न भारतीय रजवाड़ों के समय के बेशकीमती सिक्के आज भी सुरक्षित मौजूद हैं। जब इन सिक्कों के मूल्य और मूल्यांकन के बारे में चर्चा की गई, तो अजय कुमार जैन ने बताया कि किसी भी सिक्के की बनावट, उसका सन (काल) और उस पर अंकित धातु ही उसकी ऐतिहासिक वैल्यू तय करती है।

🥇 प्राचीन काल में सोने-चांदी और तांबे से बनते थे सिक्के, समय के साथ बदलता गया धातुओं का अनुपात

प्राचीन काल और आज के दौर की मुद्रा व्यवस्था में जमीन-आसमान का अंतर है। आज जहां मेटल के सिक्के चलन में हैं, वहीं पुराने जमाने में सोने, चांदी, तांबे और विभिन्न मिश्रित धातुओं के सिक्के ढाले जाते थे। इतिहास के जानकारों के अनुसार, शुरुआती दौर में सोने के सिक्कों में शुद्धता करीब 90 प्रतिशत तक होती थी, जो समय के साथ घटकर क्रमशः 85%, 80% और 70% तक होती चली गई। हर राजवंश के सिक्के पर एक विशिष्ट चिन्ह अंकित होता था, जो प्रकृति प्रेम, राजा की पसंद या धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप उकेरा जाता था और उस काल विशेष की पूरी संस्कृति को दर्शाता है।

👨‍‍👦 पिता की अमूल्य विरासत को चार भाइयों ने संभाला, बजरंगगढ़ के दुर्लभ सिक्कों से जुड़ा है खास इतिहास

अजय जैन बताते हैं कि यह सिक्के उनके परिवार की पुश्तैनी विरासत हैं, जिन्हें उनके दिवंगत पिता स्वर्गीय मिश्रीलाल जैन से उन्हें सौंपा गया है। उनके निधन के बाद परिवार के चारों भाइयों में से तीन भाइयों के पास इन ऐतिहासिक सिक्कों का अलग-अलग और भव्य कलेक्शन मौजूद है, जिनकी संख्या हजारों में है। इतिहास के प्रति गहरी रुचि रखने वाले और अर्थशास्त्र से एमए कर चुके अजय बताते हैं कि उनके संग्रह में गुना के बजरंगगढ़ शासनकाल के सिक्के सबसे ज्यादा रोचक और दुर्लभ हैं, जिनकी पहचान उन्होंने खुद की है। यह प्राचीन संग्रह न केवल उनकी पारिवारिक धरोहर है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अध्ययन का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

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