बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र परसवाड़ा में अब महिलाओं के कदम तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब खुद के व्यापार के जरिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव ला रही हैं। परसवाड़ा विकासखंड के विभिन्न गांवों की इन महिलाओं ने मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से बचत करना सीखा, बल्कि प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का सफल रोजगार भी शुरू किया है।
🏪 बैंक से लोन लेकर शुरू की दुकानें, हर महीने कमा रही हैं 10 से 15 हजार रुपये
आजीविका मिशन से मिले मार्गदर्शन और बैंक क्रेडिट लिंक (CCL) के तहत आसान ऋण मिलने से महिलाओं के हौसले बुलंद हुए हैं। महिलाओं ने किराना दुकान, कपड़ा व्यवसाय, जनरल स्टोर्स, अनाज व्यापार, सिलाई-कढ़ाई और कृषि आधारित गतिविधियों को अपना रोजगार बनाया है। इससे वे हर महीने ₹10,000 से ₹15,000 तक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। अपनी इस छोटी-छोटी बचत से महिलाएं एक बड़ा फंड तैयार कर रही हैं, जिससे आवश्यकता पड़ने पर समूह की अन्य सदस्यों को ऋण देकर उन्हें स्थानीय साहूकारों के शोषण से मुक्ति दिलाई जा रही है।
🌾 परसवाड़ा में 16 हजार से अधिक परिवार जुड़े: कई महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
परसवाड़ा क्षेत्र में अब तक 1,497 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे लगभग 16,726 परिवार सीधे जुड़े हुए हैं। इनमें से करीब 3,000 महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों में और 500 परिवार गैर-कृषि व्यवसाय में सक्रिय हैं। सरकार द्वारा महिलाओं को ₹15,000 की शुरुआती सहायता और बड़े कार्यों के लिए ₹1,10,000 तक की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देते हुए महिलाएं अपने हाथ से बनाए उत्पादों (मिट्टी के बर्तन, बांस की टोकरी, झाड़ू आदि) और दुकानों के जरिए अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।

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