शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही मां दुर्गा की आराधना से पूरा बड़वानी नगर भक्तिमय हो उठा है। शहर के प्रमुख मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन ‘मां मोटी माता मंदिर’ में दर्शन के लिए सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि यहां विराजित मां की प्रतिमा स्वयंभू और करीब 200 वर्ष पुरानी है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि इस मंदिर में मां स्वयं अपना श्रृंगार करती हैं और यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
⏳ 5 पीढ़ियों से चली आ रही सेवा की परंपरा, रियासतकालीन बावड़ी से जुड़ा है पुराना इतिहास
मंदिर के सेवादार एवं व्यापारी कुश कुमार गुप्ता बताते हैं कि उनके पूर्वजों को स्वप्न में मंदिर के जीर्णोद्धार का आदेश मिलने के बाद से इस पवित्र कार्य की शुरुआत हुई थी, और परिवार की पांचवीं पीढ़ी आज भी पूरी निष्ठा से माता की सेवा में जुटी है। कभी इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था। वहीं, इतिहासकार सतीश कुमार और व्यापारी आनंद मारू के अनुसार, मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित रियासतकालीन बावड़ी भी करीब 200 साल पुरानी है, जिसका निर्माण कुक्षी के कारीगर शेख अली ने जनकल्याण के लिए कराया था। यह प्राचीन धरोहरें आज भी बड़वानी के समृद्ध इतिहास और जल प्रबंधन की गवाह हैं।
✨ नवरात्रि पर विशेष आयोजन, विवाह के बाद आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं नवदंपति
मान्यता है कि बड़वानी आने वाले श्रद्धालु और नवविवाहित जोड़े (दूल्हा-दुल्हन) अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने से पहले मां मोटी माता के दरबार में आकर माथा टेकते हैं और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हैं। नवरात्रि की अष्टमी के दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है। ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था का यह संगम बड़वानी की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक जीवंत बना देता है।

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