October 12, 2026

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MP Environment Update: इंदौर में विकास बनाम पर्यावरण की जंग, रानी सराय परिसर के पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के ऐतिहासिक रानी सराय परिसर से एक बेहद अनोखा और दिल को छू लेने वाला मामला सामने आया है। रविवार दिनभर सोशल मीडिया पर तोतों की तरफ से मुख्यमंत्री के नाम लिखा गया एक भावुक पत्र तेजी से वायरल होता रहा। इस पत्र में परिसर में रहने वाले सैकड़ों तोतों की ओर से पुराने पेड़ों को न काटने और उनके प्राकृतिक आशियाने को बचाने की गुहार लगाई गई है। पत्र की शुरुआत “मुख्यमंत्री जी, राम-राम! हम रानी सराय के तोते हैं… हमारा घर बचा लीजिए” जैसे मार्मिक शब्दों से की गई है।

🌳 विकास की दौड़ में बेघर होने का डर: “हम अपने घोंसले कंधों पर लादकर दूसरी जगह नहीं ले जा सकते”

पत्र में पक्षियों की पीड़ा को उजागर करते हुए लिखा गया है कि पीढ़ियों से रानी सराय के पुराने विशाल पेड़ ही उनका एकमात्र घर और बसेरा रहे हैं। इन्हीं पेड़ों की शाखाओं पर उनके बच्चे बड़े होते हैं और उड़ना सीखते हैं। तोतों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंदौर का विकास और सुंदरता उन्हें भी प्रिय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास की इस अंधी दौड़ में बेजुबान पक्षियों और पुराने वृक्षों के लिए थोड़ी-सी भी जगह नहीं बच सकती? उन्होंने दर्द बयां करते हुए लिखा कि पेड़ कटने की स्थिति में वे अपने बच्चों और घोंसलों को किसी दूसरी जगह अचानक नहीं ले जा सकते।

🍃 पर्यावरणीय आकलन और संरक्षण की मांग: कल जब बच्चे पूछेंगे तोते कहां गए, तब केवल कहानी मत सुनाना

पत्र के अंत में मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना की गई है कि रानी सराय क्षेत्र में किसी भी निर्माण या कटाई की प्रक्रिया से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों के माध्यम से निष्पक्ष पर्यावरणीय आकलन (Environmental Impact Assessment) कराया जाए। परियोजना की रूपरेखा इस तरह तैयार की जाए जिससे पुराने पेड़ों को नुकसान न पहुंचे और पक्षियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके। पत्र में लिखा गया एक-एक शब्द शहरवासियों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि यदि आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियां इन तोतों की चहचहाहट से महरूम रह जाएंगी।

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