October 12, 2026

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Madhya Pradesh Food Safety: जबलपुर में खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला तैयार, फिर भी सैंपल जांच के लिए भेजने पड़ रहे हैं भोपाल

त्योहारों का सीजन आते ही बाजारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है, जिसके चलते मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। मिलावट पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लगातार सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों की जांच का अधिकांश भार अभी भी भोपाल की एकमात्र प्रयोगशाला पर टिका हुआ है। स्थिति यह है कि जबलपुर में करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का भवन बनकर तैयार है, लेकिन इसके बावजूद यहां खाद्य नमूनों की जांच का काम शुरू नहीं हो सका है।

📊 हर महीने भोपाल भेजे जाते हैं 100 सैंपल: रिपोर्ट आने में तीन महीने से अधिक का लग रहा लंबा समय

जबलपुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित गुप्ता के अनुसार, अकेले जबलपुर जिले से हर महीने लगभग 100 खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे जाते हैं। प्रदेश के अन्य जिलों से भी भारी संख्या में सैंपल पहुँचने के कारण भोपाल स्थित लैब पर काम का अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे रिपोर्ट मिलने में भारी देरी होती है। नियमानुसार पनीर और अन्य perishable खाद्य पदार्थों की जांच 14 दिन के भीतर होनी चाहिए, लेकिन रिपोर्ट आने में तीन महीने से अधिक का समय लग जाता है, जिससे मिलावट के मामलों में समय पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

🏢 भवन तैयार, मशीनें स्थापित फिर भी प्रमाणन का पेंच: एनएबीएल अप्रूवल के बिना शुरू नहीं हो पा रही जांच

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वर्ष 2019 में जबलपुर के डुमना रोड पर संभागीय प्रयोगशाला का भूमिपूजन किया गया था और 2022 तक लगभग 05 करोड़ रुपये की लागत से इसका भवन भी बनकर तैयार हो गया था। हालांकि, ड्रग लैब में कुछ काम शुरू हुआ है, लेकिन फूड लैब का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर और मशीनें तैयार होने के बावजूद इसे ‘एनएबीएल’ (NABL) का प्रमाणन नहीं मिल पाया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से सितंबर के बीच 497 नमूने भेजे गए जिनमें से आधे की ही रिपोर्ट मिली है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस लैब के पूरी तरह शुरू होने से क्षेत्रीय स्तर पर जांच में तेजी आएगी।

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