छिंदवाड़ा की सबसे पुरानी रामलीला में से एक छोटी बाजार की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन बुधवार से शुरू हो रहा है। छोटी बाजार के रामलीला रंगमंच पर 14 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला का समापन विजयादशमी के दिन रावण दहन के साथ दशहरा मैदान में होगा। गौर करने वाली बात यह है कि 137 साल पुराने इस लंबे इतिहास में कोरोना जैसी विकट महामारी के दौर में भी रामलीला का मंचन नहीं रुका। वहीं, मध्य प्रदेश की सबसे पुरानी रामलीला जबलपुर के मिलौनीगंज की मानी जाती है, जहां लगभग 161 वर्षों से मंचन हो रहा है।
✨ अयोध्या के संतों से जुड़ी है नींव, इस बार 3D बैकग्राउंड और 4K क्वालिटी में होगा लाइव प्रसारण
मंडल के संरक्षक राजू चरणागर और सतीश दुबे लाला ने बताया कि इस रामलीला की नींव 137 साल पहले अयोध्या से छिंदवाड़ा आए महासंत श्री रामदास बाबा की प्रेरणा से रखी गई थी। आधुनिकता के इस दौर में इस बार रामलीला मंच को 500 वर्गफीट से अधिक की बड़ी एलईडी स्क्रीन से तैयार किया गया है। मंच के पीछे 3D इफेक्ट्स (जैसे आसमान में उड़ते हनुमान, नदियां, जंगल और आग के दृश्य) नजर आएंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया और लोकल चैनलों के माध्यम से इसका 4K क्वालिटी में लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।
👥 45 दिनों की कड़ी रिहर्सल और 500 कलाकारों की टीम जुटी आयोजन में
मुख्य निर्देशक श्रान्त चंदेल ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की इस लीला के सफल मंचन के लिए कलाकार करीब 45 दिन पहले से ही अपनी तैयारियों और रिहर्सल में जुट जाते हैं। इस पूरी रामलीला टीम में लगभग 500 लोग शामिल हैं, जो अभिनय के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते हैं। किरीट पूजन, मंच पूजन और चौबे बाबा के आह्वान के साथ शुरू होने वाली यह रामलीला शहर के सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक है।

More Stories
Freelancers & IT Professionals: भारत में बैठकर विदेश में सर्विस देने वालों के लिए जरूरी अपडेट, 30 नवंबर है पहली डेडलाइन
MP Health Department: सेवा बहाली की मांग को लेकर सड़क पर उतरे कोरोना योद्धा, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से की मुलाकात
Bandhavgarh Tiger Reserve: जंगली हाथी के मूवमेंट पर वन विभाग की पैनी नजर, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह