मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना हजारों जिंदगियों को बचाने वाले ‘कोरोना योद्धा’ अब सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं। महामारी के बीत जाने के बाद अपनी संविदा और अस्थाई नौकरियों से हटाए गए ये स्वास्थ्यकर्मी अब भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनका दावा है कि यदि सरकार ग्रामीण और सुदूर पिछड़े इलाकों में उनकी सेवाएं बहाल कर देती, तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता था।
💼 चार हजार कोरोना योद्धाओं के सामने रोजगार का संकट, बजट की कमी का हवाला देकर हटाया गया
कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ मध्य प्रदेश के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि जब प्रदेश में महामारी का भीषण दौर था, तब सरकार के पास डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी थी। उस संकट काल में इन योद्धाओं ने अपनी सेवाएं दीं, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद बजट की कमी का हवाला देकर करीब चार हजार कोरोना योद्धाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जबकि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन की भारी कमी बनी हुई है।
🤝 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मिला प्रतिनिधिमंडल, विधानसभा में मुद्दा उठाने का मिला आश्वासन
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कोरोना योद्धाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से उनके आवास पर मुलाकात की और एक मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि महामारी के बाद से वे लगातार बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वे इस जायज मांग को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से इन अनुभवी स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाएं दोबारा लेने की अपील करेंगे।

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