हमने कभी देखा ना ईश्वर को…
लगता है वह जरूर मां जैसे दिखते होंगे।
लड़ लेती हो सब से, संतान के भले के लिए,
मां पार्वती भी तो लड़ी थी गणेश के लिए।
देख लेती हो जग की सारी खुशियां एक हमारी मुस्कान में,
यशोदा ने भी तो ब्रह्माण देखा था कृष्ण के मुंह में।
मां अन्नपूर्णा बन देती है आहार,
मां दुर्गा बन करती है तकलीफों का संघार,
मां सरस्वती बन देती है ज्ञान अपरंपार,
मां तेरे रूप हैं अनेक, जो जान ले वो पा जाता खुशियों का भंडार।
ईश्वर को देखा नहीं है हमने,
मां तुम्हीं हो इस जग की पालनहार।
हीना तिवारी
संपादक

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