मंडला। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में हाथियों के लिए आयोजित 6 दिवसीय विशेष रीजुविनेशन (पुनर्नवा) कैंप का सफलता पूर्वक समापन हो गया है। इस वार्षिक शिविर में हाथियों की विशेष देखभाल के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का गहन परीक्षण किया गया। कैंप के दौरान हाथियों की आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। प्रतिदिन सुबह उन्हें नदी में नहलाने के बाद सिर और शरीर पर तेल की मालिश की गई। इसके बाद उनकी पसंद का पोष्टिक नाश्ता और दोपहर में पौष्टिक तत्वों से भरपूर भरपूर डाइट दी गई।
🌳 सुपखार रेंज में 16 हाथियों ने की मौज: गश्ती और संरक्षण कार्यों से मिली राहत
कान्हा नेशनल पार्क की सुपखार परिक्षेत्र (रेंज) में 15 से 20 सितंबर तक आयोजित इस स्पेशल कैंप में कुल 16 हाथियों ने भाग लिया।
परीक्षण में 9 नर, 6 मादा और 1 नवजात हाथी शावक शामिल हुआ। ये सभी हाथी वर्षभर वन विभाग के साथ मिलकर बाघों की गश्ती, वन्यजीव संरक्षण, अनुश्रवण और जानवरों के ट्रांसलोकेशन जैसे बेहद कठिन व महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी सेवाएं देते हैं। विशेषकर मानसून के कठिन समय में जब वाहन नहीं जा पाते, तब इन हाथियों की भूमिका अति-महत्वपूर्ण हो जाती है।
🩺 लैब भेजे गए हाथियों के ब्लड व यूरीन सैंपल: महावतों की दक्षता बढ़ाने पर भी रहा जोर
शिविर के दौरान वन्यजीव चिकित्सकों द्वारा प्रत्येक हाथी के स्वास्थ्य का विस्तृत परीक्षण किया गया, जिसके तहत उनके रक्त (Blood), मल (Dung) और मूत्र (Urine) के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे गए।
इसके साथ ही हाथियों को एक साथ रहने का अवसर मिला, जिससे उनके सामाजिक व्यवहार को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। कैंप में महावतों और चाराकटरों की दक्षता बढ़ाने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में हाथियों के साथ बेहतर तालमेल और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
💆♂️ महावतों और चाराकटरों की भी हुई खास आवभगत: तरोताजा होकर ड्यूटी पर लौटे हाथी
कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि 6 दिनों के इस कैंप में हाथियों के साथ-साथ उनके महावतों और चारा कटरों को भी विश्राम दिया गया और उनकी विशेष देखभाल की गई।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष सुपखार रेंज में यह सफल आयोजन किया गया, जबकि इससे पूर्व हाथी ताल (खटिया) और मुक्की रेंज में शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। रीजुविनेशन कैंप के बाद सभी 16 हाथी पूरी तरह तरोताजा होकर पुनः अपने नियमित गश्ती और संरक्षण कार्यों पर लौट गए हैं।

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