छतरपुर। अनंत चतुर्दशी के ठीक अगले दिन यानी 26 सितंबर से 16 दिवसीय ‘पितृ पक्ष’ (श्राद्ध पक्ष) की शुरुआत हो रही है। सनातन धर्म में पितृ पक्ष का अत्यंत पावन और विशेष महत्व है। यह 16 दिनों की अवधि अपने पूर्वजों व पितरों के प्रति अगाध श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण अर्पित करने का समय होती है। इस दौरान किए जाने वाले तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पितरों की आत्मा को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी क्रम में विश्व प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन माध्यम से पितरों की शांति और मोक्ष हेतु विशेष महाहवन आयोजित किया जा रहा है।
🔥 बागेश्वर धाम में रातभर चला विशेष ऑनलाइन हवन: देश-विदेश से जुड़े लाखों श्रद्धालु
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पावन मौजूदगी में बीती रविवार रात से एक भव्य और अनूठे ऑनलाइन हवन का शुभारंभ हुआ, जो पूरी रात निर्विघ्न चलता रहा।
इस ऑनलाइन हवन का मुख्य उद्देश्य समाज में व्यापत नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश कर सुख, शांति और समृद्धि का संचार करना है। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया, “सन्यासी बाबा की आज्ञा और प्रेरणा से इस ऑनलाइन हवन का दिव्य संकल्प लिया गया है। इस बार का विशेष हवन पूरी तरह से हमारे पितरों की आत्मा की शांति, पितृ दोष के निवारण और उन्हें मोक्ष प्रदान करने के उद्देश्य से समर्पित किया गया है।”
🕉️ पितृ मोक्ष के लिए होंगे कुल 3 विशेष हवन: 21 अक्टूबर को आयोजित होगा अगला अनुष्ठान
धाम पर आए और ऑनलाइन जुड़े लाखों श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ हवन-पूजन कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने जानकारी दी कि पितरों की परम शांति और मोक्ष के लिए कुल 3 विशेष हवनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इस पहल के जरिए जो भक्त किन्हीं कारणों से धाम तक नहीं पहुँच सकते, वे घर बैठे ऑनलाइन तकनीक के माध्यम से आहुति देकर पुण्य के भागीदार बन सकते हैं। इस श्रृंखला का अगला यानी दूसरा भव्य हवन 21 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।
✨ नकारात्मकता का नाश और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह: विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चार से गूंजा धाम
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में लोगों के जीवन में बढ़ रहे तनाव और नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए यह पहल की गई है।
बागेश्वर धाम में प्रकांड विद्वान आचार्यों और वेदपाठी पंडितों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से मंत्रोच्चार किया जाता है। लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालु अपने-अपने घरों में बैठकर बताए गए नियमों का पालन करते हुए हवन संपन्न करते हैं। सामूहिक प्रार्थना और हवन की इस आध्यात्मिक शक्ति से व्यक्ति, परिवार और समाज को सीधा मानसिक व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
🕊️ पितरों को शांति न मिलने से परेशान रहता है परिवार: बागेश्वर बाबा ने बताया हवन का महत्व
बागेश्वर सरकार के अनुसार, जब तक पूर्वजों और पितरों को शांति व मोक्ष प्राप्त नहीं होता, तब तक परिवार में असमय बीमारियां, गृह क्लेश और आर्थिक तंगी बनी रहती है।
यदि पितृ प्रसन्न और संतुष्ट रहते हैं, तो उस कुल में निरंतर प्रगति और खुशहाली आती है। इसी संकट के समाधान हेतु बालाजी महाराज की कृपा से यह दिव्य आयोजन रचा गया है। ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे भाग लेने वाले सभी भक्तों पर पूज्य सन्यासी बाबा और श्री हनुमान जी महाराज की विशेष अनुकंपा बनी रहती है।
📅 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा पितृ पक्ष: जानें मुख्य तिथियों का गणित
भारतीय वैदिक पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर (शनिवार) से भाद्रपद पूर्णिमा के साथ पितृ पक्ष का प्रारंभ हो रहा है।
- 26 सितंबर: पूर्णिमा का श्राद्ध।
- 27 सितंबर: आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से मुख्य श्राद्ध कर्म का आरंभ।
- 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या के साथ 16 दिवसीय पितृ पक्ष का समापन।
10 अक्टूबर को ‘सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या’ मनाई जाएगी। यह दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिनकी मृत्यु की सटीक तिथि परिजनों को ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर न किया जा सका हो।

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