गुना। पूर्व IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के गंभीर मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद गुना और चाचौड़ा अंचल की राजनीति में उबाल आ गया है। पति पर मामला दर्ज होते ही उनकी पत्नी व चाचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीणा ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर ममता मीणा ने आरोप लगाया, “मेरे पति के खिलाफ यह एफआईआर पूरी तरह राजनीतिक द्वेषवश केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के इशारे पर दर्ज कराई गई है। हम इस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और अदालत में हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”
⚔️ ‘सिंधिया के कारण बीजेपी में होगी बगावत’: पूर्व विधायक ममता मीणा ने लगाए गद्दारी के गंभीर आरोप
सिंधिया पर तीखे राजनीतिक हमले जारी रखते हुए पूर्व विधायक ममता मीणा ने कहा, “ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने सत्ता स्वार्थ की खातिर कांग्रेस पार्टी के साथ गद्दारी की। उनके परिवार का इतिहास ही गद्दारी का रहा है और सिंधिया परिवार ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भी देश के साथ वादाखिलाफी की थी।”
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) दो-फाड़ होती हुई दिखाई देगी। आगामी चुनावों में क्षेत्र की जनता सिंधिया और उनके समर्थकों को करारा जवाब देगी और उन्हें अपनी घटती लोकप्रियता का अहसास हो जाएगा।
📜 ST वर्ग के फर्जी प्रमाण पत्र से DSP बनने का आरोप: पुलिस मुख्यालय सतर्कता शाखा ने दर्ज की FIR
उल्लेखनीय है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित वर्ग का अनुचित लाभ लेने के आरोप में रिटायर्ड IPS रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस मुख्यालय की सतर्कता (Vigilance) शाखा ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि रघुवीर सिंह मीणा ने एसटी वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से DSP के पद पर चयन हासिल किया और बाद में पदोन्नति सहित सेवा संबंधी अन्य लाभ प्राप्त किए।
📋 पूर्व में दर्ज था OBC वर्ग: विदिशा से जारी 1984 के जाति प्रमाण पत्र पर उठे सवाल
प्रकरण में प्रस्तुत शिकायत और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि रघुवीर सिंह मीणा MPPSC में चयन से पूर्व शासकीय शिक्षक के पद पर कार्यरत थे, उस समय उनके सेवा अभिलेखों में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) दर्ज था। हालांकि, बाद में MPPSC परीक्षा के दौरान उन्होंने स्वयं को ST वर्ग का दर्शाया और इसी आधार पर उनका चयन DSP पद पर हुआ। यह ST जाति प्रमाण पत्र वर्ष 1984 में विदिशा जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग से जारी किया गया था। वर्तमान में जांच टीम उनके मध्य प्रदेश का मूल निवासी होने से संबंधित दस्तावेजों और प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।
⚖️ उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने अमान्य घोषित किया प्रमाण पत्र: जारी करने वाले अफसर भी जांच के दायरे में
राज्य सरकार की उच्चस्तरीय छानबीन समिति (High Power Committee) ने जाति प्रमाण पत्र और उससे जुड़े रिकॉर्ड की गहन पड़ताल के बाद इस प्रमाण पत्र को पूरी तरह अवैध व अमान्य घोषित कर दिया था।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस सतर्कता शाखा ने आपराधिक मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस मामले में वर्ष 1984 में फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही आरोपी द्वारा ली गई पेंशन, पदोन्नति व अन्य सेवा लाभों से संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

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