मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला दमोह जिला अस्पताल से सामने आया है, जहाँ मानवता को शर्मसार करने वाली घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली एक गरीब बुजुर्ग महिला अपने बीमार बेटे, जिसे दस्त की गंभीर शिकायत थी, को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुँची थी। लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर से इलाज करवाने के एवज में उसे खुद फर्श पर पोंछा लगाना पड़ेगा।
🧹 सफाई के लिए तैनात हैं 52 कर्मचारी और 3 सुपरवाइजर: हर महीने खर्च होते हैं लाखों रुपए
पीड़ित बुजुर्ग महिला ने मीडिया को बताया कि वह उस नर्स को चेहरे से अच्छी तरह पहचानती है, जिसने उसे धमकाते हुए फर्श पर पोंछा लगाने को मजबूर किया। अस्पताल प्रबंधन के दावों के मुताबिक, जिला अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से करीब 3 सुपरवाइजर और 52 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है, जिन पर हर महीने 8 से 9 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद एक तीमारदार महिला से पोंछा लगवाया जाना अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
⚡ मामला तूल पकड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने थमाए नोटिस: जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन
घटना का वीडियो सामने आने और मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल के दो दिन के अवकाश पर जबलपुर रहने के कारण कार्यभार संभाल रहे डॉ. अमित प्रकाश जैन ने त्वरित एक्शन लेते हुए अस्पताल प्रबंधक, सफाई सुपरवाइजर तथा ड्यूटी पर तैनात नर्स दानवती सुमेर एवं निशा शुक्ला को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों की जांच पूरी होने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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