September 25, 2026

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LNIPE Gwalior Student Shruti Death Case: केंद्रीय मंत्रालय की मध्यस्थता के बाद LNIPE छात्रों की मांगें मंजूर; आज से लौटेंगे कक्षाओं में

ग्वालियर। बीते 8 सितंबर को असम के गुवाहाटी स्थित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE) कैंपस की छात्रा श्रुति की संदिग्ध मौत के बाद से गुवाहाटी और ग्वालियर कैंपस के छात्रों का आक्रोश बड़े आंदोलन में बदल गया था।

पिछले 15 दिनों से छात्र मृतका श्रुति के परिजनों को ₹50 लाख का मुआवजा देने और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को पद से हटाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। ग्वालियर कैंपस में चल रहा यह आंदोलन दो दिन पूर्व काफी उग्र हो गया था।

🏛️ देर रात LNIPE प्रबंधन ने मानी सभी मांगें: केंद्रीय खेल मंत्रालय की टीम भी पहुंची थी बातचीत करने

मंगलवार से ग्वालियर कैंपस के बाहर धरने पर बैठे विद्यार्थियों ने भूख हड़ताल शुरू करने के साथ ही मुख्य प्रशासनिक भवन पर ताला जड़ दिया था और कुलगुरु को भी कथित तौर पर घेराव में ले लिया था।

गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए बुधवार को केंद्रीय खेल मंत्रालय की एक विशेष टीम ग्वालियर पहुंची और आंदोलनकारी छात्रों से वार्ता कर विरोध खत्म कराने का प्रयास किया। हालांकि, 6 सूत्रीय मांगों पर अड़े छात्रों के रुख के कारण शुरुआती दौर की बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद बुधवार देर रात करीब सवा 12 बजे एक बार फिर प्रबंधन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच वार्ता शुरू हुई, जिसमें सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

📝 कुलसचिव प्रो. यतेंद्र तोमर ने दिया इस्तीफा: कुलगुरु प्रो. कल्पना शर्मा ने किया स्वीकार

भूख हड़ताल पर बैठे छात्र शैलेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान प्रबंधन ने उनकी सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं।

इनमें दो मुख्य मांगें- रजिस्ट्रार को तुरंत हटाना और मृतका के परिवार को ₹50 लाख का मुआवजा दिलाना शामिल थीं। 15 दिनों के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार रजिस्ट्रार प्रो. यतेंद्र तोमर ने छात्रों की मौजूदगी में अपना इस्तीफा कुलगुरु प्रो. कल्पना शर्मा को सौंप दिया, जिसे तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।

💰 ₹50 लाख के आर्थिक मुआवजे के लिए मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव: शिक्षकों ने भी दान की सैलरी

कुलगुरु प्रो. कल्पना शर्मा ने छात्रों की ₹50 लाख मुआवजे की मांग पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, “संस्थान अपनी ओर से ₹5 लाख और असम सरकार द्वारा ₹4 लाख की सहायता राशि पहले ही प्रदान की जा चुकी है।”

इसके अतिरिक्त, कुलगुरु ने स्वयं अपनी 5 दिनों की सैलरी देने की घोषणा की है तथा संस्थान के अन्य प्राध्यापकों से भी स्वेच्छा से वेतन दान करने की भावुक अपील की है। उन्होंने शेष राशि हेतु केंद्रीय खेल मंत्रालय को ₹50 लाख के विशेष मुआवजे का औपचारिक प्रस्ताव भेजने का लिखित आश्वासन दिया है। मांगें पूरी होने के बाद छात्रों ने देर रात अपनी भूख हड़ताल और धरना समाप्त कर दिया तथा गुरुवार से पुनः कक्षाओं में लौटने का फैसला किया है।

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