October 8, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

Katni Health Update: कैमोर में एस्बेस्टस कचरे से फैले प्रदूषण की होगी वैज्ञानिक जांच, कलेक्टर के निर्देश पर एक्शन

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के कैमोर स्थित ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन एस्बेस्टस फैक्ट्री के जानलेवा और जहरीले कचरे को हटाने व उसकी जांच की कवायद आखिरकार शुरू हो गई है। राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद कैमोर के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और क्षेत्र की मिट्टी व भूजल के नमूने एकत्र किए। गौरतलब है कि इस कचरे के कारण स्थानीय रहवासियों को हो रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर प्रमुखता से खबरें सामने आती रही हैं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया है।

🧪 वैज्ञानिक जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे गए सैंपल

कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम ने भटिया मोहल्ला (वार्ड क्रमांक-2) क्षेत्र का निरीक्षण किया। जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फुटबॉल ग्राउंड और शासकीय अस्पताल के पीछे से मिट्टी के नमूने लिए गए, जबकि भूजल की गुणवत्ता की जांच के लिए दो हैंडपंपों से पानी के सैंपल एकत्र किए गए। इन सभी नमूनों को विस्तृत वैज्ञानिक व प्रयोगशाला परीक्षण के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

⚠️ 1933 में स्थापित हुई थी फैक्ट्री, अब तक एक हजार लोगों को मिल चुका है मुआवजा

कैमोर में भारत की पहली एस्बेस्टस फैक्ट्री की स्थापना वर्ष 1933 में हुई थी। ब्रिटिश कंपनी ‘टर्नर एंड नेवाल’ ने यहां 1934 से 1989 तक संचालन किया था, जिसके दौरान नियमों के विपरीत जहरीले कचरे का निष्पादन नहीं किया गया। कनाडाई पर्यावरण संस्था की 2016 की जांच रिपोर्ट में भी यहां बड़े पैमाने पर सतही एस्बेस्टस प्रदूषण की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले इस कचरे के मामलों में अब तक लगभग एक हजार प्रभावित लोगों को कंपनी के ट्रस्ट द्वारा मुआवजा दिया जा चुका है।

Share to...