मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के निर्माण के दौरान पेड़ों और तोतों के प्राकृतिक आवास (आशियाने) को उजाड़े जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। रीगल चौराहे पर मौजूद पेड़ों पर हजारों की संख्या में तोते और अन्य पक्षी निवास करते हैं, जिन्हें बचाने के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बुधवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद अब मेट्रो कंपनी ने अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा है।
🏢 मेट्रो कंपनी ने तलाशी तीन नई जगहें, पर बजट बढ़ने और तकनीकी अड़चनों का दिया हवाला
हाईकोर्ट के निर्देश पर मेट्रो कंपनी ने रीगल चौराहे के आसपास मेट्रो स्टेशन के लिए तीन अन्य वैकल्पिक जमीनों की तलाश कर अपनी रिपोर्ट पेश की। कंपनी ने बताया कि गांधी हॉल की ऐतिहासिक इमारत के पास स्टेशन बनने से प्रोजेक्ट की लागत करीब 400 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। वहीं, प्रीतम लाल दुआ सभागृह और रीगल टॉकीज के पास न्यायाधीशों के बंगलों व अन्य संपत्तियों के प्रभावित होने तथा भारी यातायात जाम की समस्या उत्पन्न होने की बात कही गई। इन सभी वजहों से कंपनी ने अन्य विकल्पों पर अपनी असमर्थता जताई है।
⚖️ रीगल चौराहे पर ‘रानी सहाय’ को बताया सबसे उपयुक्त, हाईकोर्ट के अगले फैसले पर नजर
मेट्रो कंपनी ने अदालत को स्पष्ट किया कि तमाम तकनीकी और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रीगल चौराहे पर स्थित ‘रानी सहाय’ क्षेत्र ही मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। अदालत ने मेट्रो कंपनी के तमाम तर्कों और रिपोर्ट को सुनने के बाद मामले की अगली तारीख तय कर दी है। अब सबकी निगाहें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के आगामी फैसले पर टिकी हैं कि कोर्ट पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच क्या संतुलन बनाता है।

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