जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने अदालती आदेश का अनुपालन न किए जाने को अत्यंत गंभीरता से लिया है। अदालत ने वेटरनरी (पशु चिकित्सा) विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उन्हें 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने इस वारंट की तामीली की पूरी जिम्मेदारी भोपाल पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को सौंपी है।
💰 पेंशन-वेतन कटौती के खिलाफ अवमानना याचिका: 90 दिनों में राशि लौटाने का था स्पष्ट निर्देश
यह पूरा मामला जबलपुर के सेवानिवृत्त असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर के.के. गर्ग द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा गया कि उनके वेतन से अवैध रूप से राशि की कटौती की गई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली थी। पूर्व में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए काटी गई पूरी राशि को 90 दिनों के भीतर वापस लौटाने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो पीड़ित अधिकारी ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। एकलपीठ ने पाया कि इस याचिका पर दिसंबर 2025 में ही नोटिस जारी किए जा चुके थे।
📄 नोटिस के बाद भी अधिकारियों ने साधी चुप्पी: केवल पत्र लिखकर पल्ला झाड़ने की कोशिश
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि भोपाल स्थित पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग के अपर सचिव ने 22 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) को एक पत्र भेजा था।
इस पत्र में नोटिस प्राप्त होने तथा जबलपुर के उप निदेशक को नोडल/संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गई थी। हालांकि, इसके बाद न तो संबंधित अधिकारियों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए वकील नियुक्त किया और न ही कोई अनुपालन रिपोर्ट पेश की। एकलपीठ ने टिप्पणी की कि अधिकारियों ने महज रजिस्ट्री को पत्र भेजकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने की नाकाम कोशिश की है।
🏛️ ‘बिना सख्त कदम के पेश नहीं होंगे अधिकारी’: हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने अदालत में उपस्थिति दर्ज कराने या आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करने की कोई परवाह नहीं की।
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि गैर-जमानती/गिरफ्तारी वारंट जारी किए बिना प्रतिवादी अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे और न ही अवमानना प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। इसी के चलते कोर्ट ने भोपाल पुलिस आयुक्त को वारंट तामील कराकर 5 अक्टूबर को तत्कालीन प्रमुख सचिव की हाजिरी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

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