भोपाल। मध्य प्रदेश की जेलों में निरुद्ध कैदियों की मानसिक सेहत को दुरुस्त करने के लिए पहली बार एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक पहल की शुरुआत की गई है।
राजधानी स्थित भोपाल सेंट्रल जेल में अत्याधुनिक ‘साइकोलॉजिकल केयर सेंटर’ (Psychological Care Center) का शुभारंभ किया गया है। यहाँ डिप्रेशन, चिंता (एंजाइटी), अत्यधिक तनाव और अन्य मानसिक व्याधियों से जूझ रहे कैदियों की नियमित काउंसलिंग की जाएगी। इस सेंटर के माध्यम से ‘राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी, गुजरात’ के विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक कैदियों को जरूरी मानसिक और व्यावहारिक सहायता प्रदान करेंगे।
👥 3,300 कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस: नियमित काउंसलिंग और फॉलोअप की मिलेगी सुविधा
भोपाल सेंट्रल जेल में वर्तमान में करीब 3,300 कैदी बंद हैं।
जेल विभाग के अनुसार, लंबे समय तक जेल में रहने और आपराधिक मामलों के कारण कई कैदी गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद से गुजरते हैं। इन्हीं मानवीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सेंटर की नींव रखी गई है। यहाँ कैदियों की काउंसलिंग के साथ-साथ उनकी मानसिक स्थिति में सुधार के लिए निरंतर फॉलोअप किया जाएगा। यदि किसी कैदी की स्थिति अधिक गंभीर पाई जाती है, तो उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों और बड़े अस्पतालों में इलाज दिलाने की समुचित व्यवस्था भी की जाएगी।
🤝 राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के साथ हुआ विशेष करार: देशभर में खुला ऐसा 9वां विशेष सेंटर
यह सुधारात्मक पहल मध्य प्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (गुजरात) के बीच हुए एक औपचारिक समझौते (MOU) के तहत साकार हुई है।
यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर राकेश सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी द्वारा स्थापित यह देशभर में 9वां ऐसा केंद्र है। समझौते के तहत यूनिवर्सिटी के विषय विशेषज्ञ जेल परिसर में ही कैदियों को मानसिक परामर्श देंगे। इसके साथ ही कैदियों में व्यवहार संबंधी सुधार लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनर्वासित करने का प्रयास किया जाएगा।
🏛️ जेल डीजी वरुण कपूर ने किया सेंटर का उद्घाटन: प्रदेश की अन्य जेलों में भी होगा योजना का विस्तार
भोपाल सेंट्रल जेल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जेल विभाग के महानिदेशक (DG) वरुण कपूर ने इस सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर सेंट्रल जेल अधीक्षक मानवेंद्र सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। जेल डीजी वरुण कपूर ने कहा, “जेल विभाग का उद्देश्य केवल बंदियों की सुरक्षा और निगरानी तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और सुधारात्मक पुनर्वास पर भी ध्यान केंद्रित करना है। काउंसलिंग से कैदियों का गुस्सा और तनाव कम होगा, जिससे वे जेल से रिहा होने के बाद समाज में बेहतर नागरिक बन सकेंगे।” उन्होंने आगे बताया कि भोपाल में मिले अनुभवों और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों की सेंट्रल जेलों में भी इस तरह के सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

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