भोपाल। बेटे की दर्दनाक हत्या के बाद एक मां की दुनिया पूरी तरह उजड़ चुकी थी। जीवन-यापन का कोई सहारा न बचने पर वह सड़कों पर भीख मांगकर जैसे-तैसे अपना पेट भर रही थी। लेकिन अब भोपाल पुलिस का ‘शक्ति कैफे’ उस मां के जीवन का सबसे बड़ा सहारा बनने जा रहा है।
अब वह मांगने के बजाय अपनी मेहनत और स्वाभिमान के दम पर सम्मानजनक कमाई करेगी। भोपाल पुलिस ने घरेलू हिंसा, आपराधिक घटनाओं से पीड़ित और बेहद गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘शक्ति का कैफे’ (Shakti Cafe) की शुरुआत की है। इस अनूठी योजना की परिकल्पना वर्ष 2022 में ‘सेफ स्पेसेज फॉर वूमेन इन अर्बन एरिया’ और ‘सेफ टूरिज्म फॉर वूमेन’ जैसी अवधारणाओं के तहत की गई थी।
🌸 नारी शक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक: संकट में फंसी महिलाओं को बनाएगा आत्मनिर्भर
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में ‘शक्ति’ को नारी के ऊर्जावान, सामर्थ्यवान और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने वाले रूप में पूजा जाता है।
इसी मूल भावना को ध्यान में रखते हुए भोपाल में ‘शक्ति कैफे’ की नींव रखी गई है। इस कैफे के माध्यम से उन महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है जो घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं या किसी गंभीर पारिवारिक संकट से गुजर रही हैं। कैफे का पूरा संचालन इन्हीं महिलाओं के हाथों में सौंपा गया है ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मान के साथ कर सकें।
🏬 पायलट प्रोजेक्ट के तहत 2 स्थानों पर शुरुआत: शाहजहांनाबाद और जीआरपी मुख्यालय में खुले कैफे
भोपाल शहर में फिलहाल प्रयोग के तौर पर दो स्थानों पर शक्ति कैफे की शुरुआत की गई है।
पहला कैफे जोन-3 के शाहजहांनाबाद पुलिस परिसर में तथा दूसरा जीआरपी (GRP) मुख्यालय के पास संचालित किया जा रहा है। इन दोनों कैफे की पूरी कमान जरूरतमंद महिलाओं को सौंपी गई है। डीआईजी विनीत कपूर और एडिशनल पुलिस कमिश्नर मोनिका शुक्ला ने हाल ही में पीड़ित महिलाओं को कैफे की चाबियां सौंपकर इसका विधिवत शुभारंभ किया।
💔 बेटे की हत्या के बाद भीख मांगने वाली मां को मिला नया जीवन: पुलिस ने सौंपी कैफे की चाबी
शक्ति कैफे से जुड़ी महिलाओं में रेहान नाम के मृतक युवक की मां रानी भी शामिल हैं। बेटे की हत्या के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट पैदा हो गया था।
सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) संतोष पटेल की पहल पर ‘सामुदायिक पुलिसिंग योजना’ के तहत इस पीड़ित मां को शाहजहांनाबाद कैफे की जिम्मेदारी दी गई। भावुक होकर रानी ने कहा, “बेटे की हत्या के बाद पुलिस ने न केवल हमें न्याय दिलाया, बल्कि अब गुमठी (कैफे) देकर मुझे दोबारा जीने का सहारा भी दिया है। अब मुझे किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।”
🍲 महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहा स्वादिष्ट व्यंजन: स्वच्छता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
शक्ति कैफे में महिलाएं खुद भोजन और नाश्ता तैयार कर रही हैं।
यहाँ आने वाले लोगों और पुलिसकर्मियों को शुद्ध व स्वादिष्ट आलू-पूरी, इडली-सांभर, समोसा, पोहा सहित कई तरह के ताजे खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कैफे में साफ-सफाई और हाइजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और परिसर में आने वाले आम नागरिकों को यहाँ बहुत ही किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल रहा है।
📈 आर्थिक आजादी से बढ़ा आत्मविश्वास: शहर के अन्य हिस्सों में भी खुलेंगे नए कैफे
कैफे का संचालन कर रही महिलाओं का कहना है कि इस पहल से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
डीआईजी विनीत कपूर ने बताया कि एनजीओ (NGO) और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से पीड़ित महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो कैफे शुरू किए गए हैं, लेकिन सफलता को देखते हुए आने वाले समय में शहर के अन्य प्रमुख पुलिस परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी ‘शक्ति कैफे’ का विस्तार किया जाएगा।

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