मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) ने शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया है। इस अहम फैसले के साथ ही कैट (CAT) द्वारा दिए गए कैडर रिव्यू के निर्देश पूरी तरह से बरकरार हैं, जिससे पात्र राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के लिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
⚖️ कैट ने दिए थे 120 दिन में अतिरिक्त कैडर रिव्यू के निर्देश
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से कैट में दायर किए गए आवेदन से जुड़ा है। कैट ने 9 जनवरी 2026 को अपने आदेश में केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त आईपीएस कैडर रिव्यू की प्रक्रिया 120 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए थे। उस समय मध्य प्रदेश में डीएसपी (DSP) और एएसपी (ASP) स्तर के करीब 200 ऐसे राज्य पुलिस सेवा अधिकारी थे, जिनकी सेवा 8 वर्ष से अधिक हो चुकी थी और वे उम्र व अन्य शर्तें पूरी करने पर आईपीएस में इंडक्शन के लिए पात्र स्थिति में थे।
👥 पात्र अधिकारियों को मिलेगा लाभ, एसोसिएशन के वकीलों ने की पैरवी
कैट के इस आदेश को केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि नियमों के तहत कैडर रिव्यू समय पर होता रहा है और इसमें कोई देरी नहीं हुई है। हालांकि, जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने केंद्र की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पुलिस एसोसिएशन की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कैडर रिव्यू में देरी से पात्र अधिकारियों का हक प्रभावित होता है। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब प्रदेश के योग्य अधिकारियों को आईपीएस बनने का बहुप्रतीक्षित अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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