इंदौर। कागजों पर पॉलीहाउस का निर्माण दिखाकर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इंदौर ने निजी फर्मों के साझेदारों, बिचौलियों और बैंक अधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी की प्राथमिक एफआईआर (FIR) दर्ज की है। आरोपियों द्वारा संगठित रूप से यह फर्जीवाड़ा बैंक ऑफ बड़ौदा की खरगोन शाखा से जुड़े 33 लोन प्रकरणों में किया गया, जिसमें ₹7 करोड़ 80 लाख 85 हजार रुपये का पॉलीहाउस घोटाला शामिल है। जांच में बैंक अधिकारियों, निजी निर्माण फर्मों और उनके साझेदारों के बीच गहरी मिलीभगत का खुलासा हुआ है।
🏗️ बिना निर्माण तैयार किए फर्जी प्रमाणपत्र: एवीआईडी, किसान एग्रो और सिरांश टेक्नो पर संगीन आरोप
ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर यादव के अनुसार, ‘एवीआईडी एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ को पांच पॉलीहाउस का निर्माण करना था, लेकिन दो का भी निर्माण पूरा नहीं किया गया।
इसके बावजूद पांचों पॉलीहाउस के कूटचरित (फर्जी) कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार कर बैंक से सीधे भुगतान हासिल कर लिया गया। इसी तरह ‘किसान एग्रो’ को 20 पॉलीहाउस बनाने थे, लेकिन बिना कोई निर्माण कराए सभी 20 के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए गए और बैंकिंग चैनल के माध्यम से राशि निकाल ली गई। ‘सिरांश टेक्नो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ को भी आठ पॉलीहाउस बनाने की एजेंसी तय किया गया था, जहाँ बिना निर्माण के ही फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों के आधार पर भुगतान प्राप्त किया गया।
📄 लोन स्वीकृत होने से पहले ही बन गए कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र: जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
जांच में ईओडब्ल्यू को सभी 33 कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया कूटरचित और फर्जी मिले हैं।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि 33 में से तीन मामलों में जिस दिन लोन की राशि वितरित हुई, उसी दिन कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र बैंक में जमा कर दिया गया। 12 प्रकरणों में राशि भुगतान की तारीख से पहले ही प्रमाणपत्र बनकर तैयार था, जबकि 16 मामलों में तो बैंक से लोन मंजूर होने की तारीख से भी पहले कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र तैयार कर लिया गया था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, सीधे-सादे किसानों का विश्वास जीतकर उनसे जमीन के दस्तावेज लिए गए और फिर उनके नाम पर लोन पास कराकर पूरी राशि निजी फर्मों के खातों में ट्रांसफर करा ली गई।
🏦 एक ही बंधक जमीन पर दोबारा ₹1.90 करोड़ का लोन: तत्कालीन शाखा प्रबंधक भी साजिश में शामिल
जांच के दौरान ग्राम भीलगांव (तहसील कसरावद, खरगोन) निवासी नारायण सिंह (पिता मानसिंह तंवर) का गंभीर प्रकरण भी सामने आया।
उसकी कृषि भूमि बैंक ऑफ बड़ौदा की खरगोन शाखा में पहले से ही बंधक रखी हुई थी। इसके बावजूद बैंक की एनओसी (NOC) और सक्षम सहमति के बिना उसी जमीन को दोबारा बंधक रखकर 7 दिसंबर 2015 को ₹1.90 करोड़ का अतिरिक्त कैश क्रेडिट (CC) लोन स्वीकृत कर दिया गया। आरोपी नारायण सिंह, राजेंद्र सिंह तंवर, नितिन गांवशिंदे और तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के.के. सरवटे ने आपस में साजिश रचकर बंधक संपत्ति का बंटांकन कराया, उसका लैंड यूज (भू-उपयोग) बदला और फिर उसी बैंक में दोबारा गिरवी रख दिया।
⚖️ बैंक को कुल ₹9.70 करोड़ का चूना: बैंक अधिकारियों और फर्म डायरेक्टर्स समेत कई पर केस दर्ज
इस पूरे फर्जीवाड़े में पॉलीहाउस लोन के ₹7.80 करोड़ और दोबारा बंधक रखी गई जमीन के ₹1.90 करोड़ मिलाकर कुल ₹9 करोड़ 70 लाख 85 हजार रुपये की आर्थिक क्षति बैंक को पहुँचाई गई है।
EOW ने इन आरोपियों पर दर्ज की एफआईआर:
- राज इको फार्म्स व उसके पार्टनर: राजेंद्र सिंह तंवर और नितिन गांवशिंदे
- सिरांश टेक्नो इंडिया प्रालि: डायरेक्टर सौरभ दुबे
- किसान एग्रो: पार्टनर नरेंद्र पंवार
- एवीआईडी एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्रालि: डायरेक्टर बजपाल सिंह चौधरी व अविनाश पाटीदार
- जमीन मालिक: नारायण सिंह तंवर
- बैंक अधिकारी: तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के.के. सरवटे, लोन मैनेजर शुभम सोहनी, तत्कालीन बैंक अधिकारी चंद्रशेखर राठौड़ एवं अन्य।

More Stories
Rewa Kidnapping Solved: औलाद की चाहत में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने रची मासूम के अपहरण की साजिश; 100 किमी दूर मिली बच्ची
Bundelkhand Medical College Sagar: गर्भावस्था में खून की कमी बनी जानलेवा! सागर में प्लेसेंटा प्रीविया से पीड़ित महिला की सफल डिलीवरी
Madhya Pradesh Politics News: 9 महीने का इंतजार खत्म! चंद्रशेखर तिवारी संभालेंगे MP बीजेपी संगठन की कमान; नितिन नबीन ने जारी की सूची