मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज तहसील से इंसानियत और पशु-प्रेम की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय ने अपनी 20 वर्ष पुरानी पालतू बकरी ‘कटोरी’ (जिसे प्यार से चमेली भी कहा जाता था) के निधन पर किसी सगे परिजन की तरह शोक व्यक्त किया। उन्होंने न केवल उसका अंतिम संस्कार किया, बल्कि सनातन परंपराओं का पालन करते हुए प्रयागराज जाकर पवित्र गंगा नदी में अस्थि विसर्जन भी किया। यह अनूठी घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
💖 20 साल का साथ: घर के सदस्य की तरह रहती थी ‘कटोरी’
नवल सिंह के अनुसार, कटोरी उनके लिए केवल एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का एक अभिन्न हिस्सा थी। 20 वर्षों से वह घर के अंदर ही रहती थी, पलंग पर सोती थी और गर्मी के दिनों में उसके लिए एयर कंडीशनर की व्यवस्था रहती थी। 3 अगस्त 2026 को वृद्धावस्था के चलते जब उसका देहांत हुआ, तो पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया। परिवार का कहना है कि उसे पालना मात्र सेवा नहीं, बल्कि एक बेटी को संभालने जैसा अनुभव था।
🙏 भव्य तेहरवीं और गंगा पूजन: समाज को दिया संवेदनशीलता का संदेश
बकरी के निधन के बाद, प्रशासनिक अनुमति लेकर नवल सिंह ने उसका दाह संस्कार किया और अस्थियों को विधि-विधान से प्रयागराज में गंगा जी में विसर्जित किया। 15 अगस्त 2026 को सिरोंज में बाकायदा शोक पत्र छपवाकर तेहरवीं और गंगा पूजन का कार्यक्रम रखा गया। इसमें 500 से अधिक लोगों ने शामिल होकर दाल-बाटी, कढ़ी और लड्डू का भोज ग्रहण किया और दिवंगत ‘कटोरी’ के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। नवल सिंह का यह कदम आज के दौर में बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता और निस्वार्थ प्रेम का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

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