मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात मिली है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भोपाल को विश्व पर्यटन स्थल आगरा से जोड़ने वाले ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे’ परियोजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फोरलेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण से भोपाल से आगरा के बीच की करीब 530 किमी की दूरी जो अब तक 12-13 घंटे में तय होती थी, वह सिमटकर महज 7 घंटे की रह जाएगी। 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना विदिशा, सागर, छतरपुर, महोबा और हमीरपुर जैसे प्रमुख शहरों को सीधे एक-दूसरे से जोड़ेगी।
🏗️ सागर-कानपुर एक्सप्रेस-वे बनेगा इस प्रोजेक्ट का अहम सेतु
एनएचएआई (NHAI) की योजना के अनुसार, निर्माणाधीन सागर-कानपुर एक्सप्रेस-वे इस परियोजना के लिए एक ‘सेतु’ का काम करेगा। परियोजना के कुल 560 किमी के हिस्से में से 360 किमी सड़क मध्य प्रदेश में और 166 किमी उत्तर प्रदेश में बनेगी। सागर के बहेरिया से मोहरी तक 42 किमी का एक्सप्रेस-वे पहले ही तैयार हो चुका है, जबकि बाकी काम तेजी से चल रहा है। इस सड़क के पूरा होते ही महोबा और कानपुर के बीच का सफर भी आधा हो जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की कनेक्टिविटी सीधे आगरा और लखनऊ तक शानदार हो जाएगी।
🏭 औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) के रूप में विकसित होगा क्षेत्र
यह प्रोजेक्ट केवल दूरी कम करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। भोपाल से लेकर कानपुर तक के शहरों में ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, कृषि उत्पाद, वस्त्र और चमड़ा उद्योग को नई पहचान मिलेगी। परियोजना के आसपास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क बनाने की योजना है, जिससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और स्थानीय किसानों को अपनी उपज के लिए बड़े बाजार आसानी से उपलब्ध होंगे। साथ ही, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन और आपातकालीन चिकित्सा जैसी आधुनिक सुविधाएं भी यात्रियों को मिलेंगी।
📈 पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन उद्योग को मिलेगा। भोपाल, विदिशा, सागर, छतरपुर से लेकर आगरा तक के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों के बीच सुगम आवागमन से पर्यटन व्यवसाय में भारी वृद्धि की उम्मीद है। इस परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है और इसका निर्माण कार्य आगामी 3 वर्षों में पूरा होने की संभावना है। जिन इलाकों में डीपीआर (DPR) मंजूर हो चुका है, वहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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