मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर नागदा तहसील में चंबल नदी के तट पर एक 70 फीट ऊंची प्राचीन टेकरी स्थित है। इस स्थल पर न तो कोई भव्य मंदिर है और न ही कोई स्पष्ट शिलालेख, फिर भी स्थानीय जनमानस में यह स्थान महाभारत काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यहीं पर राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागराज तक्षक और नागों के विनाश हेतु ‘सर्पसत्र’ यानी नागयज्ञ किया था, जिसके कारण इसे ‘नागदा यज्ञ टेकरी’ भी कहा जाता है। हालांकि, इतिहास हमेशा लोकमान्यताओं के साथ ठोस प्रमाणों की भी मांग करता है।
📜 इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता के अलग-अलग मत, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस स्थल के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को लेकर जानकारों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार व इतिहासकार भगवती लाल राजपुरोहित का मानना है कि इसे ऐतिहासिक तथ्य मानने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ‘नागदा’ नाम के कई अन्य स्थान भी मध्य प्रदेश में मौजूद हैं। वहीं, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, यह स्थान ताम्र-पाषाण काल और परमार काल के प्रमाणों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके विपरीत, ऐतिहासिक धरोहर बचाव आंदोलन समिति के संयोजक बंटू बोडाना लगातार इसके संरक्षण की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यहाँ से अतीत में प्राचीन मृद्भांड और अवशेष मिल चुके हैं।
⛏️ 1955 की खुदाई से लेकर 2019 की रिपोर्ट तक, फाइलों में उलझी संरक्षण की मांग
इस टेकरी पर पुरातात्विक गतिविधियों का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1955, 1956 और 1957 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहाँ उत्खनन किया गया था, जिसके अवशेष दिल्ली के संग्रहालय में सुरक्षित हैं। इसके बाद 2012 में नगर पालिका द्वारा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव आया और मार्च 2019 के निरीक्षण में ब्लैक एंड रेड वेयर तथा मालवा वेयर जैसी प्राचीन मृद्भांड श्रेणियों का उल्लेख मिला। हालांकि, वर्ष 2024 में विधानसभा में दिए गए जवाब और 2026 तक सड़क निर्माण के टेंडर जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बावजूद, आज तक इस टेकरी को आधिकारिक रूप से संरक्षित स्मारक घोषित करने की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है।
🔍 क्या टेकरी की अगली खुदाई से खुलेगा महाभारत काल का सबसे बड़ा रहस्य?
आज स्थिति यह है कि नागदा टेकरी को न तो पूरी तरह खारिज किया जा सकता है और न ही बिना निर्णायक पुरातात्विक प्रमाण के इसे आधिकारिक तौर पर राजा जनमेजय का नागयज्ञ स्थल माना जा सकता है। हरियाणा के जींद जिले में स्थित ‘सफीदों’ को भी सर्पदमन तीर्थ के रूप में मान्यता प्राप्त है। नागदा टेकरी का असली सच क्या है, इसका जवाब किसी पुरानी किताब में नहीं, बल्कि इसी टेकरी की आगामी वैज्ञानिक और पुरातात्विक खुदाई की तह में छिपा है, जो चंबल के किनारे आज भी एक बड़े रहस्य के रूप में खड़ा है।

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