ग्वालियर। ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल (JAH) समूह के कमलाराजा अस्पताल (KRH) से संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ भिंड जिले से रेफर होकर आई एक गंभीर गर्भवती महिला अमिषा सिकरवार के परिजनों से ब्लड बैंक से खून उपलब्ध कराने के एवज में 17 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। पीड़ित परिजनों ने मामले की लिखित शिकायत करते हुए बताया कि दलाल ने दो यूनिट रक्त दिलाने के लिए उनसे ऑनलाइन 17 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए, जिसके साक्ष्य और बैंक ट्रांजेक्शन रसीद भी अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिए गए हैं। डीन और अस्पताल प्रशासन के पास लिखित शिकायत पहुंचते ही पूरे परिसर में हड़कंप मच गया है।
🛡️ सुरक्षा गार्ड ने ही कराया दलाल से संपर्क: 20 हजार से शुरू हुआ था सौदेबाजी का खेल
पीड़ित परिजन अभिषेक तोमर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, डॉक्टरों ने गर्भवती मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल दो यूनिट ब्लड की आवश्यकता बताई थी।
इसी दौरान अस्पताल परिसर में तैनात आउटसोर्स सुरक्षा गार्ड राजेश नारौलिया ने परिजनों की लाचारी का फायदा उठाते हुए उन्हें भूपेंद्र शर्मा नाम के दलाल से मिलवाया। दलाल ने शुरुआत में दो यूनिट रक्त की व्यवस्था कराने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की। काफी मिन्नतें करने के बाद सौदा 17 हजार रुपये में तय हुआ, जिसे परिजनों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया।
📢 ‘मरीज की जान बचाने की मजबूरी में दिए पैसे’: सच पता चलते ही परिजनों ने खोला मोर्चा
अभिषेक तोमर ने अपनी शिकायत में दर्द बयां करते हुए बताया कि उस वक्त उनके पास मरीज की जान बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
उन्होंने दलाल के बताए बैंक खाते में पूरी राशि ऑनलाइन माध्यम से भेज दी, जिसके बाद ही उन्हें रक्त उपलब्ध कराया गया। परिजनों का कहना है कि जब बाद में उन्हें जानकारी मिली कि सरकारी अस्पतालों में गंभीर मरीजों और प्रसूताओं को ब्लड निश्शुल्क (Free of Cost) उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान है, तब उन्होंने हिम्मत जुटाकर पूरे दलाल तंत्र का पर्दाफाश करते हुए अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की।
🚨 जेएएच की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल: 24 घंटे पहरे के बावजूद सक्रिय हैं दलाल
इस सनसनीखेज घटना ने जयाआरोग्य अस्पताल समूह की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग के लिए बाकायदा सहायक अधीक्षक नियुक्त हैं और परिसर में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती रहती है। इसके बावजूद यदि अस्पताल परिसर के भीतर ही बेखौफ होकर दलाल तंत्र फल-फूल रहा है और असहाय मरीजों के परिजनों से खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं, तो यह अस्पताल प्रशासन की एक बहुत बड़ी नाकामी और प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।
❌ आरोपी आउटसोर्स गार्ड सेवा से बर्खास्त: अस्पताल प्रबंधन ने बैठाई जांच
शिकायत सार्वजनिक होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आरोपी गार्ड को तलब किया। काफी देर बाद जब गार्ड अस्पताल पहुंचा, तो प्राथमिक पड़ताल में ही उसकी संदिग्ध भूमिका उजागर हो गई।
अस्पताल प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित आउटसोर्स सुरक्षा गार्ड राजेश नारौलिया को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा (बर्खास्त कर) दिया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी अन्य डॉक्टर, कर्मचारी या बाहरी दलाल दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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