September 26, 2026

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Gwalior High Court News: 5 साल बाद कोर्ट में पेश हुई सम्राट मिहिर भोज विवाद की जांच रिपोर्ट; क्षत्रिय और गुर्जर समाज के दावों के बीच हाईकोर्ट सख्त

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ में प्रसिद्ध शासक सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा और उनकी जातीय पहचान को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) में एक बड़ा मोड़ आया है। अदालत द्वारा गठित विशेष जांच समिति ने आखिरकार 5 साल की गहन पड़ताल के बाद अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के समक्ष पेश कर दी है। इसके साथ ही, मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस ने याचिका से जुड़े क्षत्रिय और गुर्जर दोनों समाजों से क्षेत्र में हर हाल में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की हिदायत दी है।

📜 2021 में हाईकोर्ट ने किया था जांच समिति का गठन: कमिश्नर अध्यक्ष और आईजी बने थे उपाध्यक्ष

पूरा विवाद ग्वालियर के चिरवाई नाका पर 30 अगस्त 2021 को नगर निगम द्वारा स्थापित कराई गई सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से शुरू हुआ था।

प्रतिमा की पट्टिका पर सम्राट मिहिर भोज के नाम के आगे ‘गुर्जर’ शब्द लिखवाए जाने का क्षत्रिय समाज ने कड़ा विरोध किया था और उन्हें क्षत्रिय राजवंश का शासक बताया था। मामला तूल पकड़ने पर सितंबर 2021 में राहुल साहू द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 24 सितंबर 2021 को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति का अध्यक्ष ग्वालियर संभाग आयुक्त (कमिश्नर) और उपाध्यक्ष आईजी ग्वालियर रेंज को बनाया गया था, जबकि क्षत्रिय और गुर्जर समाज से भी एक-एक प्रतिनिधि शामिल किए गए थे।

🔒 रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल लेकिन अभी सार्वजनिक नहीं: ‘सार्वजनिक धन से लगी प्रतिमा पर जाति लिखना कितना संवैधानिक?’

जांच समिति ने ऐतिहासिक साहित्यिक साक्ष्यों, अभिलेखों और इतिहासकारों की रिसर्च के आधार पर अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तैयार की है।

अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने बताया कि समिति ने इस मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया है कि ‘सार्वजनिक धन से स्थापित राष्ट्रीय जननायक की प्रतिमा के नाम के साथ जातिसूचक शब्द जोड़ना संवैधानिक रूप से उचित है या नहीं’। फिलहाल यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखी गई है और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।

🗣️ सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने रखी अपनी दलीलें: क्षत्रिय समाज ने जताई आपत्ति, गुर्जर विधायक की ओर से भी आई सफाई

अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपनी-अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया:

  • क्षत्रिय समाज का पक्ष: सम्राट मिहिर भोज के वंशज होने का दावा कर रहे अरुणोदय सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जांच कमेटी ने उनका पक्ष सुने बिना ही रिपोर्ट तैयार की है, जो न्यायसंगत नहीं है।
  • गुर्जर समाज का पक्ष: कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर की ओर से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि विधायक को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर दिए गए अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि जन प्रतिनिधि होने के नाते क्षेत्र की जनता उनसे मिलने आती है।
🕊️ क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के कड़े निर्देश: प्रदर्शनों और आयोजनों पर पाबंदी लागू

उल्लेखनीय है कि 2021 में मामला अदालत में पहुंचने के बाद से ही हाईकोर्ट के आदेशानुसार सम्राट मिहिर भोज से जुड़े किसी भी प्रकार के सार्वजनिक प्रदर्शन, जुलूस या जातीय आयोजन पर पूर्ण पाबंदी लागू है।

शुक्रवार को पुनः प्रदर्शन आयोजित किए जाने की खबरों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक दोनों समाज कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखें।

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