September 29, 2026

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Digital Markets Act EU: यूरोपीय यूनियन के नियमों पर घमासान, गूगल ने जनरल कोर्ट में दी चुनौती

Google और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच सर्च डेटा को लेकर विवाद बढ़ गया है. Google ने EU के दो आदेशों को चुनौती दी है. इन आदेशों के तहत Google को अपनी कुछ सर्विस और सर्च से जुड़े डेटा का एक हिस्सा दूसरी कंपनियों के साथ शेयर करना होगा.

Google ने 28 सितंबर 2026 को लक्जमबर्ग स्थित General Court में इन आदेशों के खिलाफ अपील की. कंपनी का कहना है कि अगर इन नियमों को लागू किया गया तो यूरोप के यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला यूरोप के Digital Markets Act यानी DMA से जुड़ा है. जुलाई में यूरोपियन कमीशन ने Google के लिए कुछ नए नियम तय किए थे. इनके तहत दूसरी कंपनियों के AI सिस्टम को Android की कुछ सुविधाओं तक बेहतर पहुंच देने की बात कही गई है. इसके अलावा योग्य प्रतिद्वंद्वी सर्च इंजन और सर्च सुविधा देने वाले AI सिस्टम को Google Search का कुछ अनाम डेटा उपलब्ध कराने का नियम भी बनाया गया है.

EU के मुताबिक यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि दूसरी सर्च कंपनियां और AI सर्विस Google के साथ बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकें और यूजर्स को ज्यादा ऑप्शन मिल सकें.सर्च डेटा शेयर करने से जुड़े नियमों को जनवरी 2027 से लागू किया जाना है, जबकि Android की इंटरऑपरेबिलिटी से जुड़े बदलाव जुलाई 2027 से लागू होने हैं.

Google को किस बात की चिंता है?

Google का कहना है कि लोगों की सर्च काफी निजी हो सकती है. उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति Google पर अपनी सेहत, रिश्तों या दूसरी निजी परेशानियों से जुड़ी चीजें सर्च कर सकता है.

कंपनी को चिंता है कि अगर ऐसे डेटा को ठीक से अनाम नहीं किया गया, तो उससे किसी व्यक्ति की पहचान या निजी जानकारी सामने आ सकती है. Google के सीनियर कॉम्पिटिशन डायरेक्टर Oliver Bethell ने भी डेटा शेयरिंग को लेकर प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़ी चिंता जताई है. Google का यह भी कहना है कि Android की कुछ सुविधाओं को दूसरी कंपनियों के लिए खोलने से सुरक्षा से जुड़े सिस्टम कमजोर हो सकते हैं.

दूसरी कंपनियों को कौन-सा डेटा मिलेगा?

EU के नियमों के तहत Google को कुछ सर्च डेटा दूसरी योग्य कंपनियों के साथ शेयर करना होगा. इसमें लोगों की सर्च क्वेरी, सर्च रिजल्ट की रैंकिंग, क्लिक और रिजल्ट देखे जाने से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है.

हालांकि, यूरोपियन कमीशन का कहना है कि इसमें यूजर्स की अकाउंट डिटेल या उनकी पूरी सर्च हिस्ट्री शेयर नहीं की जाएगी. डेटा को शेयर करने से पहले कई बदलाव किए जाएंगे. जैसे सटीक समय हटाना, बहुत लंबी या बेहद अलग तरह की सर्च को हटाना और लोकेशन की जानकारी को सामान्य बनाना.आसान भाषा में कहें तो दूसरी कंपनियों को ऐसा डेटा दिया जाएगा जिससे वे अपनी सर्च सर्विस को बेहतर बना सकें, लेकिन किसी खास व्यक्ति की पहचान सामने न आए.

EU का कहना है कि प्राइवेसी का ध्यान रखा गया है

यूरोपियन कमीशन का कहना है कि डेटा शेयर करने के सिस्टम में प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए कई नियम रखे गए हैं. डेटा सिर्फ उन योग्य कंपनियों को दिया जाएगा जो तय शर्तें पूरी करती हैं.

कमीशन के मुताबिक डेटा का इस्तेमाल सर्च सर्विस को बेहतर बनाने के लिए ही किया जाना है. कंपनियां इसे किसी दूसरे डेटा के साथ जोड़कर यूजर्स की पहचान करने की कोशिश भी नहीं कर सकतीं. EU का कहना है कि इस कदम का मकसद Google Search के मुकाबले दूसरी सर्च और AI सर्विस को आगे बढ़ने का मौका देना है.

DuckDuckGo ने EU के नियमों का समर्थन किया

प्राइवेसी पर फोकस करने वाली सर्च कंपनी DuckDuckGo ने EU के रुख का समर्थन किया है. Reuters के मुताबिक कंपनी का कहना है कि Google Search डेटा को अनाम बनाने के लिए तैयार किया गया सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा देता है.

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल Google ने EU के आदेशों को कोर्ट में चुनौती दी है. अब General Court इस मामले पर सुनवाई करेगा. इस मामले का फैसला यह तय करने में अहम हो सकता है कि EU के DMA नियमों के तहत किसी बड़ी टेक कंपनी को अपनी सर्विस और डेटा का कितना हिस्सा दूसरी कंपनियों के लिए खोलना होगा और ऐसा करते समय यूजर्स की प्राइवेसी को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा.

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