मध्य प्रदेश के दमोह जिले में खराब और जर्जर सड़कों को लेकर कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद जमीनी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिले में हाल ही में जनसुनवाई के दौरान बदहाल सड़कों के सबसे अधिक मामले सामने आने के बाद कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मुरम डालकर या प्रस्ताव भेजकर रास्ते दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद कई गांवों में आज भी सड़कों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है, जिसका ताजा उदाहरण आनंद विभाग के मंत्री और पथरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखन पटेल के इलाके से सामने आया है।
🌧️ पिपरिया लुहार गांव में कीचड़ में धंसी 108 एंबुलेंस, प्रसूता को बीच रास्ते में उतारना पड़ा
मामला दमोह जिले के पिपरिया लुहार गांव का है, जहां सोमवार को एक गर्भवती महिला की डिलीवरी के बाद उसे अस्पताल से वापस घर छोड़ने आ रही 108 एंबुलेंस भारी कीचड़ के कारण रास्ते में ही फंस गई। स्थिति यह हो गई कि मुख्य मार्ग से गांव के अंदर प्रवेश करते ही गाड़ी के पहिए कीचड़ और दलदल में धंस गए। लाख कोशिशों और धक्का देने के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं निकल पाई, तो मजबूरी में प्रसूता और उसके नवजात शिशु को बीच रास्ते में ही एंबुलेंस से उतारना पड़ा। इसके बाद परिजनों ने किसी तरह गांव से एक ट्रैक्टर की व्यवस्था की और मां-बच्चे को ट्रैक्टर पर बिठाकर घर तक पहुंचाया।
🚶♂️ ग्रामीणों का दर्द: कई बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं बनी सड़क, 2011-12 के बाद से नहीं डली मुरम
ग्रामीणों आशीष पटेल और गुड्डू पाल ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिपरिया लुहार से मुख्य मार्ग की दूरी करीब 5 किलोमीटर है, लेकिन पूरा मार्ग बरसात में पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। पूरे बरसात के सीजन में यहां के लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ता है। यदि कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल ले जाने का कोई साधन नहीं बचता और बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि साल 2011-12 में इस रास्ते पर आखिरी बार मुरम डाली गई थी, उसके बाद से पिछले 13-14 सालों में इस सड़क की सुध किसी ने नहीं ली। सरपंच से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक कई बार लिखित आवेदन देने के बावजूद आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
🗳️ चुनाव के वक्त आते हैं नेता, बाद में भूल जाते हैं ग्रामीण: स्थानीय लोगों में रोष
गांव की निवासी गीताबाई ने आक्रोश जताते हुए कहा कि उन्होंने हर किसी से गुहार लगा ली, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करके लोग वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता। गांव से बाहर आने-जाने के लिए केवल यही एकमात्र मुख्य रास्ता है, जो बारिश के दिनों में पूरी तरह दलदल बन जाता है। वहीं, 108 एंबुलेंस के पायलट अजय ने बताया कि कीचड़ अत्यधिक गहरा होने के कारण गाड़ी के टायर पूरी तरह फंस चुके थे और आगे बढ़ाना असंभव था, जिसके चलते मरीज को उतारना पड़ा।
🏛️ सरपंच बोली- सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द मिलेगी राहत
इस पूरे मामले पर गांव की सरपंच विनीता मुखरैया ने सफाई देते हुए कहा कि सड़क निर्माण के लिए विधिवत प्रस्ताव आगे भेज दिया गया है, और पूरी उम्मीद है कि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा जिससे ग्रामीणों को इस मुसीबत से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके। बहरहाल, प्रशासनिक दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

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