देवास। देवास जिला अदालत में आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया, जब अपने पिता के प्यार से वंचित एक मासूम बेटी को स्वयं प्रधान जिला न्यायाधीश ने अपने हाथों से सैंडल पहनाई। सैंडल पहनते ही बच्ची दौड़कर अपने पिता से लिपट गई।
सालों बाद बेटी को गले लगाने पर पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। इस दृश्य को देखकर अदालत परिसर में मौजूद हर शख्स भावुक हो गया। लोक अदालत में ऐसे कई भावुक पल देखने को मिले, जहां मामूली विवादों के कारण एक-दूसरे से बिछड़े 30 दंपतियों ने अपने सारे मतभेद भूलकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का फैसला किया।
🌹 ढोल-ताशों की धुन पर कोर्ट में हुआ मिलन का जश्न, दंपतियों ने एक-दूसरे को पहनाई माला
देवास जिला अदालत परिसर में शनिवार को खूब ढोल-नगाड़े बजे। यह जश्न किसी नई शादी का नहीं, बल्कि शादी के कुछ ही महीनों बाद अलग हुए जोड़ों के पुनर्मिलन का था। ये सभी परिवार पिछले कई सालों से कुटुंब न्यायालय में मुकदमे लड़ रहे थे।
लेकिन अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों की समझाइश और काउंसलिंग के प्रयासों से इन दंपतियों के उजड़े आशियाने फिर से बस गए। अदालत परिसर में ही पति-पत्नी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया। इस मौके पर सभी नव-पुनर्मिलित जोड़ों को जिला न्यायाधीश द्वारा स्मृति के रूप में पौधे भेंट किए गए।
🥁 हार पहनकर कोर्ट से बाहर निकले जोड़े, वकील और परिजनों ने की पुष्पवर्षा
लोक अदालत का सबसे खास आकर्षण वह पल रहा, जब आपसी सहमति से एक हुए सभी जोड़े ढोल-ताशों के बीच एक-दूसरे का हाथ थामे कोर्ट रूम से बाहर निकले। जुलूस में आगे-आगे माला पहने पति-पत्नी चल रहे थे, जबकि उनके पीछे कोर्ट स्टाफ, वकील और परिजन उन पर फूलों की बारिश कर रहे थे।
इस दौरान परिजनों ने ढोल की धुन पर जमकर डांस किया। वर्षों बाद अपने माता-पिता को एक होते देख बच्चों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
🕊️ छोटे-छोटे विवादों में ईगो न लाएं: कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की अपील
कुटुंब न्यायालय के प्रधान जिला न्यायाधीश जितेंद्र सिंह कुशवाहा की प्रभावी काउंसलिंग का ही असर था कि वर्षों से अलग रह रहे 30 जोड़े फिर से एक साथ रहने पर सहमत हुए।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश जितेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा, “पति-पत्नी के बीच अक्सर छोटे-छोटे विवाद व्यक्तिगत ईगो (अहंकार) के चलते बड़े बन जाते हैं और मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। जहां तक संभव हो, वैवाहिक जीवन में ईगो नहीं होना चाहिए और हर बात को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए।” वहीं अधिवक्ता दीपक नाईक ने कहा कि यह देवास जिला अदालत के लिए एक ऐतहासिक और सुखद कीर्तिमान है।

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