September 12, 2026

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Jabalpur Ground Report: कीचड़ में गूंजी किलकारी! सड़क के अभाव में रास्ते में डिलीवरी, अब खुद ही सड़क बना रहा पूरा गांव

जबलपुर। जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित शहपुरा जनपद की चिरापोड़ी ग्राम पंचायत का ‘दुर्गानगर’ गांव आज भी बदहाली के आंसू बहा रहा है। हाल ही में गांव की एक महिला रामकली बाई को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे कीचड़ भरे रास्ते से ले जा रहे थे। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती थी और कोई वाहन चलना संभव नहीं था।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते के बीच खुले आसमान के नीचे रामकली का प्रसव हो गया। बिना किसी डॉक्टर या मेडिकल सुविधा के गनीमत यह रही कि जच्चा और बच्चा दोनों की जान बच गई, लेकिन इस खौफनाक दर्द और बेबसी ने पूरे गांव की चेतना को झकझोर कर रख दिया।

⛏️ प्रशासन की उपेक्षा पर भड़का गुस्सा: 100 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे खुद सड़क बनाने में जुटे

रामकली के इस दर्द ने दुर्गानगर के ग्रामीणों में नया जज्बा भर दिया। जब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने अपने हाथों से ही भाग्य बदलने की ठान ली।

आज दुर्गानगर के 100 से ज्यादा महिलाएं, पुरुष और छोटे-छोटे बच्चे हाथों में फावड़ा, तसला और कुदाल लेकर करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। ग्रामीण अपने निजी खर्च से मुरम और पत्थर लाकर रास्ते पर डाल रहे हैं ताकि कम से कम बारिश में चलने लायक रास्ता बन सके।

🏚️ 35 साल पुराना विस्थापन का दर्द: बरगी बांध के कारण उजड़े थे 90 से ज्यादा परिवार

दुर्गानगर गांव की यह समस्या सिर्फ एक खराब सड़क की नहीं, बल्कि तीन दशकों से चले आ रहे विस्थापन के दर्द की है। लगभग 35 वर्ष पूर्व जबलपुर के प्रसिद्ध बरगी बांध परियोजना के कारण अपने घर-बार कुर्बान करने वाले आदिवासियों को यहां बसाया गया था।

वर्तमान में लगभग 90 से अधिक परिवारों और 1,200 की आबादी वाले इस गांव को कागजों पर आज भी “पूर्ण गांव” का दर्जा नहीं मिल सका है। प्रशासनिक अधिकारी हर बार इसे सिर्फ एक “टोला” बताकर टालमटोल कर देते हैं, जिससे यह क्षेत्र सभी सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाता है।

🎒 जर्जर भवन ध्वस्त, एक ही छोटे से कमरे में चल रहा है प्राथमिक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र

गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। प्राथमिक स्कूल का मूल भवन इतना जर्जर हो चुका था कि उसे 5 साल पहले ध्वस्त करना पड़ा। अब एक छोटे से अतिरिक्त कक्ष में कक्षा 1 से 5 तक का स्कूल चलाया जा रहा है।

विडंबना यह है कि इसी एक कमरे में आंगनवाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। 5वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 2-3 किलोमीटर दूर चिरापोड़ी जाना पड़ता है, लेकिन बारिश में रास्ता बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है।

🚑 एंबुलेंस न पहुंचने से शादियों में अड़चन: प्राइवेट बोरवेल से 100 रुपये में पानी खरीदने को मजबूर ग्रामीण

गांव में कच्ची और कीचड़ भरी सड़क होने के कारण कोई भी 108 एंबुलेंस या निजी वाहन अंदर नहीं आ पाता। डिलीवरी का समय पास आते ही गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में हफ्तों पहले दूसरे गांव के रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ती है।

सड़क न होने के कारण दूसरे गांव के लोग दुर्गानगर में अपने बच्चों का रिश्ता तय करने से भी कतराते हैं। इसके अलावा, गांव में पीने के पानी का भारी संकट है और लोग ₹100 देकर निजी बोरवेल से पानी खरीदने को मजबूर हैं।

🎙️ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का पक्ष: विधायक बोले- ‘वन ग्राम होने के कारण हैं नियमों की बाध्यता’

मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम ने कहा कि वे बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं। वहीं, बरगी विधायक नीरज सिंह का कहना है कि “दुर्गानगर एक वन ग्राम है, इसलिए वहां सामान्य विकास मद से काम कराने में नियमों की बाध्यता है। सड़क निर्माण के लिए करीब 30 से 40 लाख रुपये की आवश्यकता है।”

दूसरी ओर, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और प्राथमिकता के आधार पर इसे PMGSY, सुगम संपर्कता योजना या अन्य सरकारी मद में शामिल कर सड़क बनवाने का प्रयास किया जाएगा।

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