दशहरा पर्व के अवसर पर रावण जलाने की परंपरा देश में कई जगह निभाई जाती है। इनमें कुछ शहर ऐसे भी हैं जहां रावण के पुतले का वध नहीं किया जाता है। जी हां मन्दसौर में एक समाज रावण की पूजा करता है व लोग मन्नत भी मांगते है।
ऐसी मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की थी, इसी लिहाज से मंदसौर रावण की ससुराल है। मंदसौर में नामदेव समाज की महिलाएं आज भी रावण को जमाई मान कर रावण की मूर्ति के सामने घूंघट करती हैं ।
रावण के पैरों पर लच्छा (धागा) बांधती हैं। ऐसा माना जाता है कि धागा बांधने से बीमारियां दूर होती हैं। खासकर एक दिन छोड़ कर आने वाला बुखार ठीक करने के लिए लच्छा बान्ध कर मन्नत की जाती है। यहां दशहरे के दिन दिन भर रावण की पूजा की जाती है। हर साल दशहरे पर रावण के पूजन का आयोजन मंदसौर के नामदेव समाज द्वारा किया जाता है।
यक्ष अशोक बघेरवाल ने बताया कि दशहरे के दिन कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के अनुसार दिन भर कार्यक्रम आयोजित किये गए ।उन्होंने बताया कि दिनभर रावण की पूजा की जाती है। शाम को गोधूलि बेला में रावण के वध का किया जाता है।जि सकी मनोकामना पूरी होती है वह यहां दशहरे के दिन आते हैं तथा नई मन्नत मांगने के लिए भी लोग जमा होते हैं।
इसी के साथ न्यूज प्रवाह की ओर से विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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