October 6, 2026

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CSTO Security Program: ताजिक-अफगान बॉर्डर पर रूस की पैनी नजर, मिलिट्री बेस और सुरक्षा सहयोग को लेकर बड़ा अपडेट

अफगानिस्तान से सटी ताजिकिस्तान की सीमा की सुरक्षा को लेकर रूस ने एक बार फिर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है। रूसी विदेश मंत्रालय के CIS मामलों के तीसरे विभाग के निदेशक अलेक्जेंडर स्टर्निक ने स्पष्ट किया है कि मॉस्को ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर बन रहे सुरक्षा हालात पर लगातार पैनी नजर रखे हुए है और ताजिकिस्तान की दक्षिणी सीमा को सुरक्षा देने में हरसंभव मदद जारी रखेगा। रूस की सुरक्षा एजेंसियां ताजिक सीमा बलों को आधुनिक तकनीकी उपकरण, सैन्य साजो-सामान और हथियार उपलब्ध करा रही हैं, जो दोनों देशों के बीच मजबूत सुरक्षा सहयोग का एक अहम हिस्सा है।

🛡️ CSTO कार्यक्रम के तहत मिल रही मदद: 1,300 किलोमीटर लंबी सीमा पर मंडरा रहा घुसपैठ का खतरा

यह सहायता ‘कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन’ (CSTO) के उस पांच साल के विशेष कार्यक्रम के तहत दी जा रही है, जिसे 2024 में मंजूरी मिली थी। इसका मुख्य उद्देश्य ताजिकिस्तान की 1,300 किलोमीटर लंबी अफगान सीमा की सुरक्षा, निगरानी और बॉर्डर फोर्स की क्षमताओं को और अधिक बढ़ाना है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान की ओर से सीमा पार हमलों और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों के कारण चिंता लगातार बनी हुई है। अगस्त महीने में भी घुसपैठ और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके चलते रूस और सीएसटीओ ने अपनी सैन्य व तकनीकी सप्लाई को और तेज कर दिया है।

🤝 मॉस्को में अफगानिस्तान पर हो रही अहम बैठक: आतंकवाद और ड्रग तस्करी के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा

इसी बीच, राजधानी मॉस्को में अफगानिस्तान के मामलों को लेकर ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की आठवीं बैठक आयोजित की जा रही है। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत, रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान समेत कई क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा अफगानिस्तान के साथ राजनीतिक व आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद और ड्रग्स की तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त क्षेत्रीय रणनीति तैयार करना है। मध्य एशिया में रूस की 201वीं मिलिट्री बेस इस पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभा रही है।

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