मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में इन दिनों किसानों ने लीक से हटकर खेती-किसानी में नए और आधुनिक प्रयोग करने शुरू कर दिए हैं। अन्नदाताओं का मानना है कि कृषि को यदि सही मायनों में एक फायदे का सौदा बनाना है, तो कुछ अलग और नवाचारी कदम उठाने ही होंगे। इसी सोच के तहत शाहपुर-नाचनखेड़ा रोड पर चंद्रकांत लांडे सहित लगभग दो दर्जन किसानों ने मिलकर आंध्र प्रदेश की तर्ज पर ‘लाल केला’ (Red Banana) की खेती का विकल्प चुना है। किसानों ने पारंपरिक फसलों से किनारा करते हुए यह अनोखा प्रयोग किया है, जिसके तहत अब वे न केवल लाल केले के स्वादिष्ट फल यानी लुंगर से मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि फसल कटाई के बाद फेंके जाने वाले वेस्टेज तने से भी कमाई के नए रास्ते तलाश चुके हैं।
🧵 स्व-सहायता समूह की महिलाओं में उत्साह, लाल केले के तने से निकलेगा प्राकृतिक लाल रंग और शानदार रेशा
केले की खेती में यह नया प्रयोग ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’ वाली कहावत को बिल्कुल सटीक साबित कर रहा है। सामान्य तौर पर केले के पौधों से फल मिलने के बाद उसका तना बेकार समझकर कचरे में फेंक दिया जाता था या यूं ही छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब इस तने की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है। सबसे खास बात यह है कि लाल केले के तने से निकलने वाले रेशे (फाइबर) में प्राकृतिक रूप से लाल रंग उभरकर आता है। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है। महिलाएं इस प्राकृतिक लाल रंग और रेशे का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के खूबसूरत हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पाद तैयार करेंगी।
👜 रेशे से बनेंगे स्टाइलिश घरेलू उत्पाद और कपड़े, महिलाओं को मिलेगा सस्ता और बेहतरीन फाइबर
विशेषज्ञों के अनुसार, लाल केले के इस तने से रेशम की तरह बेहद चमकदार और मजबूत रेशा तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी खासी डिमांड रहने की पूरी उम्मीद है। इस रेशे की मदद से सुंदर टोकरी, पेन स्टैंड, वाटर बैग, पर्स, चटाई और अन्य घरेलू सजावटी सामानों के साथ-साथ कपड़े भी आसानी से बनाए जा सकते हैं। लवकुश स्व-सहायता समूह से जुड़ी अनुसुईया चौहान ने बताया कि लाल केले के तने से मिलने वाला प्राकृतिक लाल रंग का यह रेशा बेहद स्टाइलिश, टिकाऊ और उपयोगी होता है, जिससे उत्पादों को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
👩🌾 दो दर्जन किसानों ने मिलकर की अनूठी पहल, महिलाओं को केमिकल युक्त रंगों से मिलेगी पूरी निजात
महिला किसान आरती लांडे ने जानकारी दी कि जिले के दो दर्जन से अधिक प्रगतिशील किसानों ने लाल केले की फसल लगाकर यह साहसिक और सफल प्रयोग किया है। उनके खेतों में इस नई फसल का उत्पादन बेहद शानदार रहा है, जिससे केले के लुंगर के साथ-साथ अब तनों की बिक्री से भी दोहरा मुनाफा होगा। तनों से रेशा निकालकर जब उत्पाद बनाए जाएंगे, तो इससे महिलाओं को हानिकारक केमिकलयुक्त रंगों से भी पूरी तरह निजात मिल जाएगी। किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस अनूठी पहल पर ध्यान देते हुए सरकार की ओर से सब्सिडी या स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित करने में सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

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