Madhya Pradesh : प्रदेश में ब्लैक फंगस इंफेक्शन (Black Fungous Infection) से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बीमारी से लड़ने के लिए देश में पहली बार मध्यप्रदेश के भोपाल और जबलपुर में म्यूकर माइमाइकोसिस यूनिट खोली जाएंगी। बुधवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों ने अमेरिका के वरिष्ठ संक्रामक बीमारी के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ मनोज जैन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। इसके बाद यह निर्णय लिया गया।
चर्चा के दौरान बीमारी के कारण, फैलाव के आधार, प्राथमिक लक्षण की पहचान, इलाज और उपचार को लेकर चर्चा की गई। मंत्री सारंग ने बताया कि म्यूकर ब्लैक फंगस के बारे में आमजन और मरीजों में जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देश के पहला म्यूकर यूनिट की स्थापना होगी। इसके पहले चरण में भोपाल और जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में यूनिट बनेगी। सारंग ने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। ब्लैक फंगल इंफेक्शन से पीड़ित कुछ मरीजों की सर्जरी कर इंन्फेक्टेड अंगों को निकालना पड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज के मरीजों को है।
सारंग ने बताया कि इसे लेकर प्रदेश सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। इसके रोकथाम और उपचार के लिए पहले फेज में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 10-10 बिस्तर की यूनिट तैयार की जाएगी। बीमारी में मुख्य रूप से चार विंग ईएनटी, नेत्रों रोग विभाग, न्यूरोलॉजी और मेडिसिन इन्वॉल्व होती है। इन चारों विभाग को मिला कर यूनिट शुरू की जाएगी।
बीमारी में सर्जरी की जरूरत होती है। जो मरीज कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उनके लिए अलग से ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था की गई है। जो कोरोना से संक्रमित होने के दौरान ब्लैक फंगस इंफेक्शन के शिकार हुए हैं, उनके लिए भी अलग से ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को भी बीमारी के लक्षण दिखाए दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
क्या होता है ब्लैक फंगस
ये एक फंगस डिसीज है, जो म्यूकर माइकोसिस नाम के फंगल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों, जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।
ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया, तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता, तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगल फैला है, शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।
कहां पाया जाता है यह ब्लैक फंगस
ये गंभीर, लेकिन रेयर इंफेक्शन है। ये फंगल वातावरण में कहीं भी रह सकता है। खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लड़कियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगल पाया जाता है।
यह होते है इसके लक्षण
शरीर के किस हिस्से में इंफेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

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