जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने राजधानी भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक भवन के ध्वस्तीकरण (Demolition) आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
नगर निगम भोपाल द्वारा विधिवत स्वीकृत भवन निर्माण को गिराने का आदेश जारी किया गया था, जिसके विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस मनिंदर एस भट्टी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है।
📜 2024 में मिली थी भवन निर्माण की अनुमति, 2026 में जारी हुआ नोटिस: सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता सोनाली श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता मोनिस मोहम्मद खान को 25 दिसंबर 2024 को सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार भवन अनुज्ञा (Building Permit) प्रदान की गई थी। इसके तहत बेसमेंट, स्टिल्ट फ्लोर और प्रथम तल से चतुर्थ तल तक का निर्माण स्वीकृत था।
इसके बावजूद, सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज एक शिकायत के आधार पर नगर निगम ने 5 मार्च 2026 को नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद 21 अगस्त 2026 को आदेश पारित कर तथाकथित अवैध निर्माण को 15 दिनों में हटाने के निर्देश दे दिए गए। याचिकाकर्ता ने इन सभी प्रशासनिक नोटिसों और आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में चुनौती दी।
⚖️ क्या बिना अधिकार क्षेत्र के जारी हुए नोटिस? नगर निगम अधिनियम की धारा 302 और 307 पर उठे सवाल
याचिका में मुख्य कानूनी प्रश्न यह उठाया गया कि मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 302 और 307 के अंतर्गत ध्वस्तीकरण या निर्माण कार्य रोकने का वैधानिक अधिकार केवल नगर निगम कमिश्नर के पास है।
लेकिन इस मामले में नोटिस और ध्वस्तीकरण के आदेश अन्य अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा जारी किए गए। अधिवक्ता सोनाली श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि अधिकार-विहीन प्राधिकारी द्वारा की गई यह कार्रवाई कानून की स्थापित प्रक्रिया के पूरी तरह विपरीत है। इसके अलावा, निरीक्षण रिपोर्ट न सौंपने, याचिकाकर्ता के जवाबों की अनदेखी करने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया।
🛑 अगली सुनवाई तक कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं: एक सप्ताह बाद होगी मामले की अगली सुनवाई
अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत कानूनी तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने प्रोफेसर कॉलोनी स्थित प्लॉट नंबर-15 पर नगर निगम की किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी सुनवाई तक विवादित आदेश के आधार पर याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई भी बलपूर्वक या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की गई है।

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