America : अमेरिका में हिंसा के बीच कांग्रेस (Congress) ने जो बाइडेन (Biden) की जीत पर मुहर लगा दी है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति (President) जो बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले हैं, जो बहुमत से ज्यादा हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 वोटों की जरूरत होती है। कांग्रेस की मंजूरी के बाद जो बाइडेन आधिकारिक तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे।
इस फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी को कानून के अनुसार जो बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वो चुनावी नतीजों का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन इसके बावजूद सत्ता को जो बाइडेन को सही तरीके से सौंपेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने हार नहीं स्वीकार की और उन्होंने चुनाव के नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।
वहीं, कांग्रेस की मुहर के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडेन को अब 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने गुरुवार को घोषणा की कि कांग्रेस ने अमेरिकी चुनाव में जो बाइडेन को विजेता दिखाने वाले इलेक्टोरल कॉलेज की टैली को कंफर्म कर दिया है। इससे पहले वाशिंगटन स्थित कैपिटल हिल में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने जबरदस्त हंगामा किया।
लंबे संघर्ष के बाद सुरक्षाबलों ने इन्हें बाहर निकाला और कैपिटल हिल को सुरक्षित किया। वाशिंगटन की हिंसा में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कैपिटल हिल में इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके तहत जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने पर मुहर की तैयारी थी। इसी दौरान हजारों की संख्या में ट्रंप समर्थकों ने वॉशिंगटन में मार्च निकाला और कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया। यहां डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता में बनाए रखने, दोबारा वोटों की गिनती करवाने की मांग की जा रही थी।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रदर्शन की निंदा की, साथ ही इसके लिए उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। जो बाइडेन ने कहा कि ट्रंप को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए, अपने समर्थकों को समझाना चाहिए। अमेरिका में हुई हिंसा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि लोकतंत्र में सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से होना जरूरी है। इस तरह के प्रदर्शनों के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है।

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