मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में शिक्षा विभाग द्वारा संचालित आधा दर्जन से अधिक हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इन संस्थानों में अब्दुल कादिर सिद्दीकी शासकीय उर्दू कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल हरिपुरा, शासकीय उर्दू हायर सेकेंडरी स्कूल खैराती बाजार, शासकीय उर्दू हायर सेकेंडरी स्कूल लालबाग, बहादरपुरा, शाहपुर और इच्छापुर स्कूल शामिल हैं। इन सभी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक करीब 5 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। शैक्षणिक सत्र का आधा समय बीत जाने के बावजूद इन बच्चों को उर्दू माध्यम की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे नाराज परिजनों ने शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
📖 छात्रों को नहीं मिला उर्दू सिलेबस; प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी ने फोटोकॉपी कराकर किताबें बांटने का दिया आश्वासन
अधिकारियों का पक्ष और स्थिति:
- किताबों का वितरण: इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रोहिणी पवार ने बताया कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को कुछ विषय की किताबें वितरित की जा चुकी हैं। जिन विषयों की किताबें शेष रह गई हैं, उनका सिलेबस वेबसाइट से प्राप्त करके उनकी फोटोकॉपी कराकर जल्द ही बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी।
- गैर-उर्दू शिक्षकों की पदस्थापना: उर्दू स्कूलों में गैर-उर्दू भाषी शिक्षकों की पदस्थापना के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार उर्दू स्कूलों में गैर-उर्दू भाषी शिक्षक भी अध्यापन कार्य करा सकते हैं।
🏫 किताबों के अभाव में अंधकारमय हो रहा विद्यार्थियों का भविष्य; शिक्षक संघ ने की कलेक्टर से मांग
संघ और स्थानीय लोगों की आपत्तियां:
- मोहम्मद नौशाद अंसारी का बयान: स्थानीय निवासी मोहम्मद नौशाद अंसारी ने बताया कि सरकारी उर्दू स्कूलों में समय पर किताबें न मिलने के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि शेष किताबें जल्द से जल्द वितरित की जाएं।
- ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित की मांग: अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के मध्य प्रदेश सलाहकार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने कलेक्टर विवेक कुमार से मिलकर उर्दू स्कूलों में तत्काल किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी नियमानुसार दर्ज संख्या के आधार पर मुफ्त पाठ्यपुस्तकें देने का आदेश है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस मामले में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।

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