मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में मंगलवार को किसानों का एक अनोखा और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। रबी सीजन के दौरान बिजली की सुचारू आपूर्ति न होने और बार-बार ट्रांसफॉर्मर जलने से परेशान धामनोद गांव के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में जला हुआ ट्रांसफॉर्मर लादकर सीधे रतलाम कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। किसानों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर खराब ट्रांसफॉर्मर रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगभग 1 घंटे तक चले इस धरने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में विद्युत विभाग के कार्यपालन मैकेनिक (DE) को मौके पर बुलाकर किसानों की समस्या का तुरंत समाधान करने के कड़े निर्देश दिए गए, जिसके बाद किसान धरना समाप्त करने के लिए राजी हुए।
📋 आश्वासन के बाद धरने से उठे किसान; लोकेशन का सर्वे कराकर एक्स्ट्रा लोड शिफ्ट करने का भरोसा
अधिकारियों की वार्ता और समाधान:
- डीई की मौजूदगी: रतलाम ग्रामीण के विद्युत विभाग के डीई विक्रान्त ठाकुर ने मौके पर पहुंचकर धरनारत किसानों से सीधी बातचीत की।
- लोड शिफ्टिंग का वादा: अधिकारियों ने किसानों की शिकायत सुनने के बाद तुरंत गांव की लोकेशन का सर्वे करवाकर ट्रांसफॉर्मर पर पड़े अतिरिक्त बिजली लोड को दूसरी जगह शिफ्ट करने का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त किया।
⚠️ क्षमता से 1.5 गुना अधिक लोड; 3 साल से ओवरलोड स्थिति झेल रहे हैं धामनोद के किसान
किसानों की मुख्य समस्याएं:
- अस्थाई कनेक्शनों का दबाव: रबी फसल सीजन की शुरुआत होते ही कृषि विद्युत सप्लाई में लगे ट्रांसफॉर्मर के ओवरलोड होकर जलने का सिलसिला तेज हो जाता है। किसान सत्यनारायण पाटीदार ने बताया कि धामनोद गांव का ट्रांसफॉर्मर पिछले 3 वर्षों से ओवरलोड स्थिति में चल रहा है।
- विभाग की अनदेखी: इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा नए अस्थाई कनेक्शन देकर इस पर क्षमता से 1.5 गुना ज्यादा अतिरिक्त लोड डाल दिया जाता है। विधायक और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें और आवेदन देने के बाद भी कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।
🚜 विद्युत विभाग पर लापरवाही के आरोप; अपने संसाधनों और गाड़ियों से ट्रांसफॉर्मर ला रहे हैं किसान
संसाधनों की कमी और विभागीय नाकामी:
- हर गांव की यही कहानी: किसान नेता देवेंद्र सिंह ने बताया कि यह केवल धामनोद गांव की समस्या नहीं है, बल्कि जिले के लगभग हर गांव में यही स्थिति बनी हुई है।
- निजी वाहनों से परिवहन: ट्रांसफॉर्मर जलने पर बिजली विभाग के पास न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही परिवहन के साधन। ऐसे में किसानों को खुद ही भारी रिस्क उठाकर ट्रांसफॉर्मर उतारना पड़ता है और अपने निजी वाहनों या ट्रैक्टर-ट्रॉली से रतलाम जिला मुख्यालय लाकर जमा कराना पड़ता है। लंबे इंतजार के बाद ही नया ट्रांसफॉर्मर मिल पाता है, जिससे रबी फसलों की समय पर सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

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