मध्य प्रदेश की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ी दल-बदल याचिका पर देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) का बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का कड़ा आदेश (अल्टीमेटम) जारी किया है। यह अहम निर्देश मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमंग सिंघार द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा की प्रभावी पैरवी के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) से जुड़े सभी मामलों का शीघ्र और समयबद्ध निराकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
📜 हाईकोर्ट से खारिज हुई थी याचिका; सुप्रीम कोर्ट ने दिया तात्कालिकता का निर्देश
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि:
- हाईकोर्ट का फैसला: इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा हाईकोर्ट में निर्मला सप्रे पर दल-बदल कानून के तहत तत्काल कार्रवाई की मांग वाली याचिका दायर की गई थी, जिसे हाईकोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास प्रक्रियाधीन है और पक्षों के बयान दर्ज हो चुके हैं।
- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और लोकतांत्रिक परंपराओं को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित इस प्रकरण को दो महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया है।
💬 ‘संविधान की गरिमा को मजबूत करने वाला आदेश’, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले उमंग सिंघार
नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया:
- फैसले का स्वागत: बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं को मजबूत करने वाला है।
- जनादेश के साथ न्याय: उन्होंने कहा, “जनता ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनकर विधानसभा भेजा था। जनादेश के साथ विश्वासघात करने वालों को दल-बदल कानून के तहत जवाबदेह बनाना जरूरी है। हमें पूरा भरोसा है कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में जल्द निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय लेकर जनता के जनादेश का सम्मान करेंगे।”
🔄 2023 में कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं चुनाव; बाद में बीजेपी की ली थी सदस्यता
राजनीतिक घटनाक्रम:
- कांग्रेस से जीत: निर्मला सप्रे ने मध्य प्रदेश के 2023 के विधानसभा चुनावों में बीना सीट से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी।
- बीजेपी में शामिल: चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही उन्होंने पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था। एक चुनावी सभा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें बीजेपी की सदस्यता दिलाई थी।
- कांग्रेस को लगा था झटका: सप्रे से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत और छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा सीट से विधायक कमलेश शाह भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, जिसे उस समय कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया था।

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